छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण के मामले में पूरे देश में नई लकीर खींच दी है। जल शक्ति मंत्रालय के जल संचय जन भागीदारी (JSJB) अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देशभर में पहला स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो और जनभागीदारी जुड़ जाए, तो जल संकट का समाधान कठिन नहीं है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का मानना है कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का नाम नहीं है। छत्तीसगढ़ में इसे किसानों, पंचायतों, जल सखियों और स्थानीय समुदायों को जोड़कर एक जन अभियान का रूप दिया गया है। मुख्यमंत्री खुद एक किसान परिवार से आते हैं, इसलिए उन्होंने सिंचाई और ग्रामीण जीवन में पानी के महत्व को बारीकी से समझा है। यही वजह है कि राज्य की योजनाओं के केंद्र में खेत और गांव को रखा गया है।
इस सफलता की सबसे बड़ी धुरी बना है 5 प्रतिशत मॉडल , जिसकी शुरुआत कोरिया जिले से हुई। इस नवाचार के तहत किसान अपनी कृषि भूमि का 5 प्रतिशत हिस्सा स्वेच्छा से भू-जल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) के लिए दे रहे हैं। यहाँ ऐसी संरचनाएं बनाई गई हैं, जिससे बारिश का पानी खेत से बाहर बहने के बजाय वहीं रुककर जमीन के भीतर रिस जाता है। इसमें किसान सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि एक सक्रिय भागीदार के रूप में सामने आए हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के जिलों ने भी लोहा मनवाया है। प्रदेश के पांच जिले—सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम—देश के शीर्ष 10 जिलों की सूची में शामिल हुए हैं। यह उपलब्धि दर्शाती है कि पंचायत स्तर पर किए गए कार्यों का असर जमीन पर दिख रहा है।
जल संरक्षण के प्रयासों का सीधा असर आंकड़ों में भी दिख रहा है। राज्य में पानी की कमी वाले ब्लॉक (Over-exploited blocks) की संख्या 26 से घटकर अब 19 रह गई है। इतना ही नहीं, पांच क्रिटिकल ब्लॉक भी सामान्य श्रेणी में आने की राह पर हैं। प्रधानमंत्री के कैच द रेन मंत्र— जहां जल गिरे, वहीं सहेजें —को छत्तीसगढ़ पूरी शिद्दत से लागू कर रहा है।
छत्तीसगढ़ की यह कामयाबी रातों-रात नहीं मिली है। राज्य ने लगातार खुद को बेहतर किया है:
यह मॉडल न केवल जल स्तर को ऊपर ला रहा है, बल्कि खेती को मानसून की मार से राहत दिलाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। गांव-गांव में पानी की उपलब्धता बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और महिलाओं का पानी ढोने का श्रम भी कम हो रहा है। छत्तीसगढ़ का यह जन भागीदारी मॉडल भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।
*जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम...
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) September 2, 2026
‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर एक नई उपलब्धि अपने नाम की है। हमारे सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम जिले भी देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।… pic.twitter.com/4JEP3Nl31q
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