भारत की उच्च शिक्षा का स्वर्णिम दशक: 70% बढ़े विश्वविद्यालय, विदेशी छात्रों का बढ़ा भरोसा
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शिक्षा के क्षेत्र में भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। ‘ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन’ (AISHE) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में भारत उच्च शिक्षा के एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा है। 2014-15 से 2023-24 के बीच संस्थानों, छात्रों और विदेशी छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

संस्थानों के जाल का तेजी से विस्तार पिछले 10 वर्षों में देश में शिक्षण संस्थानों की बाढ़ आ गई है। साल 2014-15 में जहां देश में 760 विश्वविद्यालय थे, वहीं 2023-24 तक इनकी संख्या 1,289 हो गई है, जो लगभग 70% की बड़ी उछाल है। इसी तरह कॉलेजों की संख्या में 25% से ज्यादा की वृद्धि हुई है।

4.5 करोड़ तक पहुंचा छात्रों का नामांकन उच्च शिक्षा लेने वाले छात्रों की संख्या में भी भारी इजाफा हुआ है। 2014-15 में 3.42 करोड़ छात्र नामांकित थे, जो अब बढ़कर 4.50 करोड़ हो गए हैं। ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) जो पहले 23.7% था, अब 30% पर पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य इसे 2035 तक 50% तक ले जाने का है।

महिला शिक्षा में शानदार प्रगति आंकड़ों के अनुसार, उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी में 42.2% का उछाल आया है। आज स्थिति यह है कि महिलाओं का GER (31.2%) पुरुषों (28.9%) से अधिक हो गया है। साथ ही, शिक्षण संस्थानों में महिला शिक्षकों की संख्या में भी 36.7% की बढ़ोतरी हुई है, जो शैक्षणिक क्षेत्र में बढ़ते महिला सशक्तिकरण को दर्शाता है।

SC, ST और OBC वर्गों की बढ़ती भागीदारी सामाजिक समावेशिता के मामले में भी यह दशक क्रांतिकारी रहा है। उच्च शिक्षा में ओबीसी छात्रों की हिस्सेदारी 32.8% से बढ़कर 40.1% हो गई है। वहीं, एससी और एसटी छात्रों के नामांकन और उनके GER में भी पिछले वर्षों की तुलना में काफी बेहतर सुधार देखा गया है।

विदेशी छात्रों के लिए हॉटस्पॉट बना भारत भारत की बढ़ती शैक्षणिक साख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या में 37.5% की वृद्धि हुई है। 2014-15 में जहां 42,293 विदेशी छात्र भारत में पढ़ रहे थे, वहीं अब यह संख्या 58,134 पहुंच गई है।

STEM और रिसर्च में बढ़ता रुझान साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) जैसे विषयों में छात्रों की रुचि बढ़ी है। STEM पाठ्यक्रमों में नामांकन 1.02 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। इसके अलावा, पीएचडी करने वाले छात्रों की संख्या भी 1.17 लाख से बढ़कर 3.43 लाख हो गई है, जो देश में रिसर्च और इनोवेशन के बदलते माहौल का प्रमाण है।

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