बोर्ड रूम की राजनीति छोड़ो, मैदान पर जान लगाओ : पाकिस्तान क्रिकेट के बिखरते ढांचे पर मोहम्मद यूसुफ का तीखा हमला
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पाकिस्तान क्रिकेट इन दिनों भारी उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में शर्मनाक हार के बाद टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ताओं पर चौतरफा सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच, पूर्व कप्तान मोहम्मद यूसुफ ने सोशल मीडिया पर एक कड़े संदेश के साथ मोर्चा खोल दिया है।

अंदरूनी कलह पर यूसुफ का प्रहार मोहम्मद यूसुफ ने टीम में चल रहे विवादों और चयन समिति के फैसलों पर नाराजगी जताई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इंग्लैंड दौरे से खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ को वापस बुलाने का फैसला सिर्फ प्रदर्शन का नतीजा नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान क्रिकेट की पुरानी बीमारी यानी अंदरूनी गुटबाजी का हिस्सा है।

दिग्गजों की कमी का दर्द यूसुफ ने तंज कसते हुए लिखा, हम इन खिलाड़ियों की जगह जहीर अब्बास, जावेद मियांदाद, इंजमाम-उल-हक या सईद अनवर जैसे महान खिलाड़ी नहीं भेज रहे हैं। यह कदम केवल फैसलों में मतभेद और विवादों के उस जाने-पहचाने चक्र को दर्शाता है जिसने लंबे समय से पाकिस्तान क्रिकेट को बर्बाद कर रखा है।

1992 से चली आ रही अस्थिरता पूर्व कप्तान ने याद दिलाया कि 1992 वर्ल्ड कप के बाद से पाकिस्तान क्रिकेट बार-बार ऐसी ही उथल-पुथल झेल रहा है। उनके अनुसार, बार-बार टीम में बदलाव करने से न केवल खिलाड़ियों का मनोबल गिरता है, बल्कि मैदान पर प्रदर्शन करने की क्षमता और प्रशंसकों का भरोसा भी कमजोर होता है।

सफलता ही एकमात्र दवा यूसुफ ने खिलाड़ियों और बोर्ड को सलाह देते हुए कहा कि समस्याओं का समाधान बोर्ड रूम की बैठकों में नहीं, बल्कि क्रिकेट के मैदान पर है। उन्होंने साफ लहजे में कहा, अगर पाकिस्तान को अपनी खोई हुई साख वापस पानी है, तो उसे बोर्ड रूम की राजनीति छोड़कर पूरी तरह से अपने खेल पर फोकस करना होगा। सफलता ही सबसे बड़ी दवा है।

क्या तीसरे टेस्ट में होगी वापसी? इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में पाकिस्तान 0-2 से पीछे है। इससे पहले सीरीज के बीच में ही सात खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के सदस्यों को घर भेज दिया गया था, जिससे टीम में हड़कंप मच गया था। अब 9 सितंबर से एजबेस्टन में होने वाले तीसरे टेस्ट में पाकिस्तान के सामने अपनी बची-कुची इज्जत बचाने की बड़ी चुनौती है।

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