एम्स की लापरवाही या जटिल बीमारी? 13 साल के इंतजार के बाद 15 वर्षीय तन्वी ने तोड़ा दम
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देश के सबसे बड़े अस्पताल, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली में इलाज के नाम पर एक 15 वर्षीय बच्ची की मौत ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजस्थान के कोटा की रहने वाली तन्वी, जो बचपन से ही दिल की एक जटिल बीमारी से जूझ रही थी, मंगलवार तड़के ज़िंदगी की जंग हार गई।

13 साल तक तारीखों का खेल

तन्वी के पिता मुकेश परियानी का आरोप है कि वे 2012 से अपनी बेटी को लेकर एम्स के चक्कर काट रहे थे। जब वह महज दो साल की थी, तब उसमें VSD + पल्मोनरी एट्रेसिया नामक जन्मजात बीमारी का पता चला था। पिता का कहना है कि 2014 और 2015 में सर्जरी की तारीखें तय हुईं, लेकिन हर बार उन्हें टाल दिया गया और बच्ची को केवल दवाओं के सहारे रखा गया।

सुधारात्मक सर्जरी से ट्रांसप्लांट तक का सफर

एम्स के सीटीवीएस (CTVS) विभाग के अनुसार, 2018 में डॉक्टरों ने सर्जरी न करने का फैसला लिया था। डॉक्टरों का तर्क था कि तन्वी के फेफड़ों तक खून पहुंचाने वाली मुख्य रक्त वाहिकाएं (Pulmonary Arteries) विकसित नहीं थीं, जिससे सर्जरी जानलेवा हो सकती थी। दो हफ्ते पहले उसे हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना जांचने के लिए भर्ती किया गया था।

एंडोस्कोपी के बाद बिगड़ी स्थिति

परिजनों के अनुसार, सोमवार को तन्वी की एंडोस्कोपी की गई, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी। मंगलवार सुबह करीब 2:50 बजे बच्ची ने अत्यधिक कमजोरी महसूस की और उसका ऑक्सीजन सैचुरेशन गिरकर 48 प्रतिशत पर आ गया। अस्पताल के अनुसार, उसे हाइपोक्सिक स्पेल आया और कार्डियक अरेस्ट के बाद सुबह 5:06 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया।

पिता के तीखे आरोप और साजिश की आशंका

बेटी को खोने के बाद मुकेश परियानी ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही और प्रताड़ना का आरोप लगाया है। पिता का दावा है कि अस्पताल के कर्मचारी बार-बार उनसे कागजात मांग रहे थे और डिस्चार्ज लेने का दबाव बना रहे थे। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और चेतावनी दी है कि वे बेटी का शव तब तक नहीं लेंगे जब तक उन्हें मौत का स्पष्ट कारण और जवाब नहीं मिल जाता।

अनुत्तरित सवाल

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि 2013 में सर्जरी के लिए जांच पूरी हो गई थी, तो 2018 तक का लंबा समय क्यों बर्बाद किया गया? क्या 2018 में लिया गया सर्जरी न करने का फैसला तन्वी की जान बचाने के लिए था या यह डॉक्टरों की तकनीकी विफलता थी? फिलहाल, एम्स प्रशासन की ओर से इन सवालों पर कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं आया है।

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