अमेरिका-ईरान संघर्ष: मची तबाही के बाद अब क्या है तेहरान का अगला कदम?
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अमेरिका और ईरान के बीच पिछले छह महीनों से जारी तनाव मंगलवार रात एक खौफनाक मोड़ पर पहुंच गया। ईरान ने जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और इराक में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागीं।

यह हमला अमेरिका के उस सैन्य अभियान के जवाब में देखा जा रहा है, जिसमें एक शादी समारोह को निशाना बनाया गया था। ऑस्ट्रिया स्थित ईरानी दूतावास के अनुसार, इस हमले में 4 साल के बच्चे सहित 5 नागरिकों की मौत हो गई। इस घटना के बाद मध्य पूर्व में युद्ध के बादल और गहरे हो गए हैं।

खाड़ी देशों में और बढ़ सकता है सैन्य तनाव

ईरान के पास सबसे पहला विकल्प खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों को तेज करना है। विश्लेषकों का मानना है कि तेहरान सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा ढांचे (तेल और गैस रिफाइनरियां) को भी निशाना बना सकता है।

ऐसी स्थिति में वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है। इतना ही नहीं, बिजली संयंत्रों और जल शोधन संयंत्रों पर हमले से अमेरिका के सहयोगी देशों में भारी मानवीय संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की सप्लाई पर खतरा

ईरान के पास सबसे घातक हथियार होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना है। यह दुनिया के लिए तेल की जीवन रेखा है। ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि उन पर दबाव बढ़ता है, तो वे इस मार्ग से तेल निर्यात को पूरी तरह ठप कर सकते हैं।

अगर ऐसा हुआ, तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिसका सीधा असर भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। हालांकि अभी भी इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही बहुत सीमित हो चुकी है।

लाल सागर और समुद्री व्यापार पर दबाव

ईरान अपने सहयोगी हूती विद्रोहियों के जरिए लाल सागर (Red Sea) में समुद्री शिपिंग को और अधिक निशाना बना सकता है। पहले ही कई चीनी और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां इस मार्ग से अपने जहाजों को हटाकर लंबे रास्तों का चयन कर चुकी हैं। किसी भी और हमले से वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होगी।

साइबर युद्ध: क्या पश्चिमी देशों में फैलेगा संघर्ष?

ईरान के पास मध्य पूर्व के बाहर भी वार करने के विकल्प खुले हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है साइबर हमला । ब्रिटेन और अमेरिका ने पहले भी ईरान पर बिजली और पानी के संयंत्रों को हैक करने के आरोप लगाए हैं। भविष्य में ईरान पश्चिमी देशों के महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर अपनी ताकत दिखा सकता है।

दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर

ईरान के सामने अब बड़ी चुनौती यह है कि वह अमेरिका को जवाब भी दे और क्षेत्रीय युद्ध को उस स्तर तक न ले जाए कि वह खुद के अस्तित्व के लिए खतरा बन जाए।

फिलहाल, दुनिया की नजरें ईरान के अगले रुख पर टिकी हैं। होर्मुज में रुकावट या खाड़ी देशों में बड़ा हमला, न केवल अमेरिका के लिए बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी आपदा साबित हो सकता है।

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