नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड और भूस्खलन को आठ दिन बीत चुके हैं, लेकिन तबाही का मंजर थमने का नाम नहीं ले रहा है। नेपाल पुलिस के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मृतकों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है, जबकि 4,858 लोग अब भी लापता हैं।
युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य सुरक्षाबल लगातार प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चला रहे हैं। अब तक 6,541 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। राहत कार्यों के लिए करीब 7,912 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है, जो मलबे में फंसे लोगों को निकालने और सड़कों को साफ करने का काम कर रहे हैं।
कहां सबसे ज्यादा तबाही? पुलिस आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा शव चितवन (348), नवलपरासी ईस्ट (217), नवलपरासी वेस्ट (190) और नुवाकोट (155) से बरामद किए गए हैं। प्रशासन ने 911 अज्ञात शवों की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड की है ताकि परिजन उनकी पहचान कर सकें। अब तक 1,113 शवों का पोस्टमार्टम पूरा हो चुका है।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर कैसे आई आपदा? यह त्रासदी 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर हिमस्खलन और चट्टानों के टूटने के बाद शुरू हुई। भोटे कोशी नदी में अचानक आए उफान ने कई कस्बों को तबाह कर दिया। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने इसे सामान्य बाढ़ नहीं, बल्कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण पैदा हुई एक बड़ी आपदा करार दिया है।
583 विदेशी नागरिकों का भी है अता-पता नहीं इस आपदा में 30 से अधिक देशों के 583 विदेशी नागरिक लापता हैं। इसमें 275 भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के 128 लोगों की भी तलाश की जा रही है। इसके अलावा अमेरिका, यूक्रेन, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के नागरिक भी लापता लोगों में शामिल हैं।
यूपी तक पहुंची आपदा की मार नेपाल की बाढ़ का भयावह असर भारत के उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिल रहा है। नेपाल से बहकर आने वाली नदियों में अब तक 17 शव मिले हैं, जिनके बाढ़ पीड़ितों के होने की आशंका है। भारतीय अधिकारी इन शवों की पहचान की प्रक्रिया में जुटे हैं।
परिजन मजबूरन कर रहे प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार एक सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी हजारों लोगों का कोई सुराग न मिलने से परिवारों में हताशा है। अपनों के जीवित मिलने की उम्मीद खो चुके कई परिजन अब उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं।
जलवायु परिवर्तन के खतरे की चेतावनी प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने वैश्विक समुदाय को आगाह करते हुए कहा है कि ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना हिमालयी क्षेत्र के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। उन्होंने इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तत्काल सतर्कता और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया है।
नेपाल जल महा प्रलय में बच्चों की हालत देखी नहीं जा सकती हैं इतने मासूम बच्चे रो रहे हैं...!
— Ratan acharya (@ratanac81230688) September 1, 2026
जिन बच्चों को सुरक्षित स्थान पर बस द्वारा ले जाया जा रहा तब इस बच्चे की बस छूट गई थी..!
उसके बाद बच्चा रोने लगा तो स्थानीय लोगों ने बच्चों को उसके साथ वाले लोगों के साथ ऑटो में भेजा..! pic.twitter.com/gT2S6AJpDn
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