फरीदाबाद: 4 घंटे धूप में खड़ी रही 11वीं की छात्रा, अपमान से आहत होकर तीसरी मंजिल से लगाई छलांग
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फरीदाबाद के डबुआ-गाजीपुर रोड स्थित नवोदय विद्या निकेतन स्कूल में 11वीं कक्षा की एक छात्रा की दर्दनाक मौत ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। 16 वर्षीय जानवी ने स्कूल की तीसरी मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी।

इस घटना के बाद अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस और शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया है।

क्या है पूरा मामला? मृतक छात्रा के पिता प्रमोद कुमार का आरोप है कि उनकी बेटी को एक शिक्षिका ने सजा के तौर पर चार घंटे तक चिलचिलाती धूप में खड़ा रखा था। कथित तौर पर यह सजा कक्षा में बिरयानी खाने को लेकर हुए एक विवाद के बाद दी गई थी। अपमान से आहत जानवी ने तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।

NHRC ने लिया कड़ा संज्ञान आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने इस घटना को अत्यंत गंभीर और खतरनाक बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून की धारा 17 और किशोर न्याय (JJ) अधिनियम की धारा 75 के तहत स्कूलों में बच्चों को किसी भी प्रकार का शारीरिक या मानसिक दंड देना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

कानूनगो ने कहा, एक बच्ची को सजा के तौर पर घंटों धूप में खड़ा रखना और उसके परिणाम स्वरूप उसका अपनी जान गंवा देना, यह बेहद गंभीर मामला है। हमने संबंधित अधिकारियों को नोटिस भेजकर जिम्मेदार शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

स्कूल प्रशासन का बचाव और जांच दूसरी ओर, स्कूल के प्रिंसिपल आरके शर्मा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका दावा है कि छात्रा बाथरूम जाने का बहाना बनाकर क्लास से बाहर गई थी और उसे कोई सजा नहीं दी गई थी।

फिलहाल, डबुआ थाना पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। अब मानवाधिकार आयोग के दखल के बाद पुलिस स्कूल के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और अन्य छात्रों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

बहस खड़ी हुई है इस दुखद घटना ने स्कूलों में बच्चों के साथ होने वाले व्यवहार और उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या स्कूलों में अनुशासन के नाम पर छात्रों को दी जाने वाली सजा का स्वरूप इतना अमानवीय होना चाहिए कि मासूम अपनी जान गंवाने को मजबूर हो जाए?

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