नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। मंगलवार तक मृतकों का आंकड़ा 1000 के पार पहुंच गया है, जबकि करीब 4500 लोग अभी भी लापता हैं। इस त्रासदी में जान गंवाने वाले विदेशी नागरिकों के शवों की पहचान और उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने के लिए भारत और नेपाल ने एक औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।
शवों की पहचान की प्रक्रिया नेपाली अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विदेशी नागरिकों के अवशेषों को सौंपने के लिए एक व्यवस्थित प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। सबसे पहले शवों का दस्तावेजीकरण और पोस्टमॉर्टम किया जा रहा है। इसके बाद, उंगलियों के निशान और फोरेंसिक नमूनों के जरिए पहचान की पुष्टि की जा रही है। अंत में, संबंधित दूतावास के साथ समन्वय कर पासपोर्ट या पहचान पत्र का सत्यापन किया जाता है।
DNA मिलान क्यों अनिवार्य? तबाही के कारण बड़ी संख्या में शवों को स्वास्थ्य संबंधी खतरों के चलते फिलहाल दफना दिया गया है। ऐसी स्थिति में, जहां शवों की शारीरिक पहचान संभव नहीं है, वहां डीएनए (DNA) मिलान को अनिवार्य कर दिया गया है। नेपाली अधिकारी शवों से डीएनए नमूने एकत्र कर रहे हैं ताकि उन्हें परिजनों के प्रोफाइल से मिलाया जा सके।
परिजनों को क्या करना होगा? जिन परिवारों के सदस्य लापता हैं, वे नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड की गई तस्वीरों और विवरणों के माध्यम से पहचान का प्रयास कर सकते हैं। यदि पहचान की पुष्टि होती है या डीएनए मिलान की आवश्यकता पड़ती है, तो परिजनों को काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क करना होगा।
संपर्क और सहायता के लिए:
नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहचान से जुड़ी सारी जानकारी और प्रोटोकॉल नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। परिजनों से अपील की गई है कि वे दूतावास को अपने डीएनए प्रोफाइल की एक प्रति अवश्य भेजें ताकि अंतिम संस्कार और शवों की सुपुर्दगी में देरी न हो।
Press Release regarding identification of mortal remains of victims of the recent flash flood in Nepal ⬇️
— IndiaInNepal (@IndiaInNepal) September 1, 2026
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