लद्दाख: लद्दाख के दुर्गम नुन-कुन पर्वत श्रृंखला में भारतीय सेना के जांबाज पायलटों ने साहस की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय सेना के लिए नामुमकिन कुछ भी नहीं है। 18,600 फीट की ऊंचाई पर फंसे एक मरीज की जान बचाने के लिए पायलटों ने मौत को मात देते हुए एक बेहद चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया।
क्या थी चुनौती? शनिवार, 29 अगस्त को नुन-कुन की पहाड़ियों पर एक मरीज को एयरलिफ्ट करना था। चुनौती सिर्फ ऊंचाई नहीं, बल्कि वहां की भौगोलिक स्थिति भी थी। जमीन पूरी तरह ढलान भरी थी और वहां हेलिकॉप्टर उतारने के लिए कोई समतल जगह नहीं थी। ऊपर से तेज हवाएं पायलटों के काम को और भी कठिन बना रही थीं।
कैसे हुआ यह इंपॉसिबल मिशन? इतनी अधिक ऊंचाई पर हवा का दबाव कम होने से हेलिकॉप्टर के इंजन की क्षमता और रोटर की लिफ्ट (उठाने की शक्ति) घट जाती है। मिशन को सफल बनाने के लिए पायलटों ने हेलिकॉप्टर का वजन कम करने का फैसला किया। सभी गैर-जरूरी उपकरणों को बाहर निकाला गया और ईंधन की मात्रा भी बिल्कुल सीमित कर दी गई ताकि हेलिकॉप्टर वजन कम होने के कारण आसानी से हवा में बना रहे।
वन-स्किड लैंडिंग का जोखिम लैंडिंग के लिए कोई जगह न होने पर पायलटों ने वन-स्किड लैंडिंग का सहारा लिया। इसमें हेलिकॉप्टर को पूरी तरह जमीन पर नहीं उतारा जाता, बल्कि उसके एक हिस्से (स्किड) को ढलान पर टिकाकर संतुलन बनाया जाता है। इस दौरान पायलटों को हेलिकॉप्टर को बेहद कम ऊंचाई पर स्थिर रखना पड़ा, जो कि बेहद खतरनाक और तकनीकी रूप से सटीक काम है।
सेना ने दी जानकारी भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने सोशल मीडिया पर इस साहसिक मिशन की सराहना की है। सेना के अनुसार, पायलटों ने असाधारण सटीकता और संकल्प का प्रदर्शन किया। ढलान को छूते हुए हेलिकॉप्टर के एक स्किड के सहारे मरीज को सुरक्षित अंदर लेना किसी चमत्कार से कम नहीं था।
क्या होती है वन-स्किड लैंडिंग? यह एक ऐसी तकनीक है जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब पहाड़ी इलाकों में उबड़-खाबड़ या ढलान वाली जमीन पर हेलिकॉप्टर उतरने के लिए जगह नहीं होती। इसमें पायलट बड़ी कुशलता से रोटर की गति को नियंत्रित करते हुए हेलिकॉप्टर को संतुलित रखते हैं, ताकि जमीन से स्पर्श न्यूनतम रहे और मरीज को सुरक्षित अंदर लिया जा सके।
Daring High-Altitude Casualty Evacuation 🇮🇳
— @firefurycorps_IA (@firefurycorps) August 29, 2026
In a daring rescue mission at 18,600 ft near Nun Kun, Indian Army Aviation pilots evacuated a casualty from an extremely challenging slope with no landing space and strong winds.
With the helicopter lightened by removing non-essential… pic.twitter.com/NaOyFRWxSR
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