नेपाल में पिछले पांच दिनों से जारी फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) ने भारी तबाही मचा रखी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में मरने वालों की संख्या 724 तक पहुंच गई है, जबकि लगभग 2,500 लोग अभी भी लापता हैं। बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है, जिसमें 18,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी जुटे हुए हैं।
आपदा की मार झेल रहे अलग-अलग जिलों से शवों के मिलने का सिलसिला जारी है। अब तक चितवन से 246, नवलपरासी ईस्ट से 165, नवलपरासी वेस्ट से 63, गोरखा से 57, नुवाकोट से 51, धाडिंग से 45, तनहुन से 35 और रसुवा से 13 शव बरामद किए गए हैं। लापता लोगों की सूची में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के कर्मचारी, आम नागरिक, सरकारी कर्मी और 589 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
नुवाकोट और देवीघाट जैसे इलाकों में तबाही का मंजर हृदयविदारक है। पूरे गांव कीचड़ और मलबे की मोटी परतों के नीचे दब गए हैं। जीवित बचे लोग अपने घर और सामान को मलबे से निकालने की जद्दोजहद कर रहे हैं। वहीं, केरल के 36 लोगों का एक समूह कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित नेपाल-भारत सीमा पार कर गोरखपुर पहुंचा और वहां से अपने घर लौट गया है।
भारत ने नेपाल की मदद के लिए 11 टन राहत सामग्री के साथ अपनी चौथी उड़ान भेजी है। इसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल हैं। खास बात यह है कि इस टीम में सुरंगों में बचाव कार्य के लिए तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ फोरेंसिक टीम भी भेजी गई है, ताकि डीएनए जांच के जरिए पीड़ितों की पहचान की जा सके।
बाढ़ ने नेपाल के बिजली बुनियादी ढांचे को भी तहस-नहस कर दिया है। त्रिशूली नदी के किनारे स्थित कई प्रमुख हाइड्रो प्रोजेक्ट्स और सोलर प्लांट्स मलबे में दबकर नष्ट हो गए हैं। इससे बिजली उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जो देश के लिए एक और बड़ी चुनौती बन गया है।
नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में अमेरिका ने भी बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने बाढ़ प्रभावित 10,000 परिवारों के लिए 3.6 मिलियन डॉलर (लगभग 30 करोड़ रुपये से अधिक) की मानवीय सहायता देने की घोषणा की है। इस सहायता में तीन महीने का आपातकालीन भोजन और जीवन रक्षक दवाएं शामिल हैं।
*VIDEO | Nuwakot: Survivors of Nepal s devastating flash floods on Wednesday are now battling injuries, exhaustion and the trauma of seeing their lives collapse within minutes.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 30, 2026
Many have taken shelter at a relief camp set up at the District Ayurveda Hospital in Bidur in Nuwakot… pic.twitter.com/YlziXQQvoL
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