उज्बेकिस्तान की धरती में छिपा भारत का भविष्य, ऊर्जा से लेकर खनिजों तक क्या है ‘खजाना’?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य एशिया के इस देश में न केवल कूटनीतिक संबंधों की नई परतें खुल रही हैं, बल्कि यह देश प्राकृतिक संसाधनों का वह ‘खजाना’ भी है, जिसकी भारत को अपनी विकास यात्रा के लिए सख्त जरूरत है।

यूरेनियम और सोने का महाभंडार

उज्बेकिस्तान विश्व के प्रमुख यूरेनियम उत्पादक देशों में से एक है। भारत अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है, जिसके लिए सुरक्षित ईंधन स्रोत अनिवार्य है। उज्बेकिस्तान के साथ परमाणु ईंधन और यूरेनियम आपूर्ति पर सहयोग भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।

इसके अलावा, उज्बेकिस्तान सोने के बड़े भंडार और तांबा, चांदी एवं जस्ता जैसे खनिजों से समृद्ध है। उज्बेकिस्तान सरकार ने भारतीय कंपनियों को अपने खनन और धातु क्षेत्र में निवेश करने का खुला न्योता दिया है, जो मेक इन इंडिया के लिए एक बड़ा अवसर है।

प्राकृतिक गैस और ऊर्जा सुरक्षा

उज्बेकिस्तान की अर्थव्यवस्था में प्राकृतिक गैस की भूमिका रीढ़ की हड्डी जैसी है। देश में बिजली उत्पादन और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। भारत के लिए मध्य एशिया से ऊर्जा स्रोतों तक सीधी पहुंच बनाना एक रणनीतिक प्राथमिकता रही है। यह साझेदारी ऊर्जा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

कनेक्टिविटी: व्यापार की असली चुनौती और समाधान

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार अब 1.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। फार्मा, डिजिटल सेवा, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, सबसे बड़ी बाधा अभी भी कनेक्टिविटी है। फिलहाल सामान पहुंचाने के लिए लंबे और महंगे मार्गों का सहारा लेना पड़ता है।

इस समस्या के समाधान के रूप में भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह के जरिए मध्य एशिया तक पहुंच बनाने की दिशा में काम कर रहा है। यदि परिवहन का यह नेटवर्क मजबूत होता है, तो भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापारिक लागत में कमी आएगी और द्विपक्षीय संबंधों को एक नई गति मिलेगी।

सिर्फ खनिज नहीं, सामरिक गठबंधन

प्रधानमंत्री मोदी की यह चौथी उज्बेकिस्तान यात्रा दर्शाती है कि भारत अब मध्य एशिया में अपनी पैठ गहरी करना चाहता है। ताशकंद में राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ हुई वार्ता रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर केंद्रित है। यह दौरा स्पष्ट करता है कि भारत इस क्षेत्र को सिर्फ संसाधनों के नजरिए से नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है।

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