मुसलमानों को बाहर निकालना हिंदू विचार नहीं , न्यूयॉर्क में मोहन भागवत ने कही बड़ी बात
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में एक दुनिया, एक मानवता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिंदुत्व और मानवता पर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी मुस्लिम को भारत से बाहर निकालने की सोच हिंदू विचारधारा के विपरीत है।

यहाँ उनके भाषण की 5 प्रमुख बातें हैं:

1. मुसलमानों को निकालना हिंदू विचार नहीं

भागवत ने 2018 के अपने पुराने बयान को दोहराते हुए कहा कि यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं है, तो वह हिंदू विचारधारा को समझ ही नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदू परंपरा का मूल आधार सत्य की खोज है, न कि किसी को बाहर करना। उन्होंने जोर दिया कि हर इंसान की गरिमा का सम्मान करना ही सच्चा हिंदू धर्म है।

2. धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मंजिल एक

भागवत ने धर्मों की विभिन्नता को समुद्र की ओर जाने वाली अलग-अलग नदियों के उदाहरण से समझाया। उन्होंने कहा कि रीति-रिवाज, पूजा पद्धति और अनुशासन के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन अंत में सभी का लक्ष्य उसी अंतिम सत्य तक पहुँचना है। उन्होंने विविधता को प्रकृति का नियम बताया और कहा कि अलग रास्ते होने का मतलब यह नहीं कि हम आपसी संघर्ष करें।

3. रस्मों को ही मंजिल न समझें

एक दिलचस्प उदाहरण देते हुए भागवत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति रोशनी की तरफ उंगली से इशारा करे, तो हमें उंगली के बजाय रोशनी को देखना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हम केवल धार्मिक कर्मकांडों (उंगली) को ही सब कुछ मान लेंगे, तो उस दिव्य सत्य (रोशनी) को कभी नहीं देख पाएंगे।

4. इंद्रियों की सीमा और सत्य का अनुभव

पशु चिकित्सक (Veterinary Doctor) होने का जिक्र करते हुए भागवत ने कुत्ते का उदाहरण दिया। उन्होंने समझाया कि जैसे जानवर की देखने की क्षमता इंसान से अलग होती है और वह दुनिया को अपने चश्मे से देखता है, वैसे ही इंसान भी अपनी इंद्रियों की सीमाओं में बंधा है। उन्होंने कहा कि हमारे अनुभव अलग हो सकते हैं, लेकिन हम सभी एक ही वास्तविकता की तलाश कर रहे हैं।

5. राजनीति से पहले समाज में बदलाव जरूरी

मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि समाज में स्थायी बदलाव राजनीति से नहीं, बल्कि जनमानस की सोच से आता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीति जनमत के अनुसार चलती है, इसलिए यदि समाज की सोच में सुधार आएगा, तो उसका असर अपने आप नीतियों और राजनीति पर पड़ेगा। उन्होंने RSS के सेवा कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि संगठन का लक्ष्य बिना किसी भेदभाव के मानवता की सेवा करना है।

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