नेपाल में जलजला: 188 किमी/घंटे की रफ्तार, हिरोशिमा जैसी तबाही!
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नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया है। विशेषज्ञ डॉ. उत्तम बाबू श्रेष्ठ के विश्लेषण के अनुसार, यह कोई सामान्य बाढ़ नहीं थी, बल्कि एक ऐसा सैलाब था जिसकी गति बुलेट ट्रेन को भी मात दे रही थी।

7 मिनट में 22 किलोमीटर का सफर

विश्लेषण के मुताबिक, लेन्दे नदी के स्रोत पर हुए भूस्खलन के बाद मलबे और पानी के सैलाब ने महज सात मिनट में 22 किलोमीटर की दूरी तय की। इसकी औसत गति 188 किलोमीटर प्रति घंटा आंकी गई है। CCTV फुटेज और भूकंपीय सेंसर के आंकड़ों का मिलान करने पर विशेषज्ञों ने पाया कि यह सैलाब मौत की रफ्तार से आगे बढ़ रहा था।

बेत्रावती और त्रिशूली तक पहुंचा मौत का साया

डॉ. श्रेष्ठ का अनुमान है कि यह सैलाब केरुंग से बेत्रावती तक महज 4 मिनट में पहुंच गया होगा। आगे चलकर बेत्रावती से त्रिशूली तक की 35 किलोमीटर की दूरी भी इस सैलाब ने मात्र 11 मिनट में पूरी की। इतनी तीव्र गति ने बचाव कार्यों को पूरी तरह से असंभव बना दिया था।

हिरोशिमा बम जितनी भयावह ऊर्जा

इस आपदा की विनाशक शक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें उत्पन्न ऊर्जा को 51 किलोटन TNT के बराबर आंका गया है—जो हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम की ऊर्जा के करीब है। 610 मीटर लंबा और 40 मीटर ऊंचा मलबा जब 1.5 किलोमीटर नीचे गिरा, तो उसने भीषण गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा पैदा की।

विशेषज्ञ की चेतावनी: सावधानी जरूरी

हालांकि यह आंकड़े डरावने हैं, लेकिन डॉ. श्रेष्ठ ने स्पष्ट किया है कि भूस्खलन की ऊर्जा और परमाणु विस्फोट की ऊर्जा के काम करने का तरीका अलग होता है। इसे पूरी तरह से एक विस्फोटक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह शुरुआती वैज्ञानिक अनुमान है, न कि कोई स्थापित सत्य।

नेपाल में अब तक का सबसे बड़ा संकट

यह आपदा नेपाल के इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में से एक है। 800 मीटर लंबा ग्लेशियर टूटने से मची इस तबाही में अब तक 669 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2426 लोग अभी भी लापता हैं। पूरा इलाका मलबे में तब्दील हो चुका है और राहत टीमें अब भी अपनों की तलाश में जुटी हैं।

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