शुद्धिकरण असल में छुआछूत है: राहुल गांधी का BJP-RSS पर कड़ा प्रहार, FIR की मांग
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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सत्ताधारी दल की विचारधारा दलितों और पिछड़ों के खिलाफ है और शुद्धिकरण के नाम पर खुलेआम छुआछूत को बढ़ावा दिया जा रहा है।

शुद्धिकरण की रस्म एक आपराधिक कृत्य

राहुल गांधी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जब कांग्रेस के दलित नेता मंदिर जाते हैं या पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे किसी सार्वजनिक मंच पर भाषण देते हैं, तो उसके बाद BJP के लोग उस स्थान का शुद्धिकरण करते हैं। राहुल ने इसे सीधे तौर पर संविधान का उल्लंघन और अपराध करार दिया।

उन्होंने कहा, शुद्धिकरण छुआछूत का ही दूसरा नाम है। यह साबित करता है कि BJP के सदस्य दलितों को अशुद्ध मानते हैं, जो भारतीय संविधान के तहत एक दंडनीय अपराध है।

SC/ST एक्ट के तहत FIR की मांग

राहुल गांधी ने उत्तराखंड में हुई घटना का जिक्र करते हुए केंद्र और राज्य सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा, शुद्धिकरण की रस्म निभाना SC/ST एक्ट का सीधा उल्लंघन है। हम मांग करते हैं कि उत्तराखंड में इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज की जाए।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती दी कि वे खुद को पूरे भारत का प्रधानमंत्री कहते हैं, तो उन्हें इन भेदभावपूर्ण कृत्यों के खिलाफ कठोर रुख अपनाना चाहिए।

भारत में दो विचारधाराओं की लड़ाई

अपनी बात को विस्तार देते हुए राहुल ने कहा कि देश में इस वक्त दो विचारधाराओं के बीच संघर्ष चल रहा है। एक तरफ अंबेडकर, गांधी, नेहरू और पटेल का संविधान है, तो दूसरी तरफ RSS-BJP की विचारधारा है।

उन्होंने स्कूलों में दलित बच्चों से टॉयलेट साफ कराने, गांव के कुओं पर प्रतिबंध और चाय की दुकानों पर दलितों के लिए अलग कप का इस्तेमाल किए जाने जैसी घटनाओं को भारत की कड़वी सच्चाई बताया। उन्होंने कहा कि आज भी दलितों के साथ हो रहा यह सामाजिक भेदभाव आने वाली पीढ़ी की मानसिकता को दूषित कर रहा है।

BJP के सांगठनिक बदलाव पर बेरुखी

जब राहुल गांधी से BJP की नई संगठनात्मक टीम के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने कहा, मेरे लिए BJP का नया या पुराना संगठन एक ही है। हमारी लड़ाई विचारधारा को बचाने और संविधान की रक्षा करने की है। वे किसे पद देते हैं, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।

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