पेंड्रारोड-गेवरा रोड रेलवे परियोजना के तहत कोटमी-देवरी मार्ग पर निर्माणाधीन रेलवे ब्रिज अब स्थानीय लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। निर्माण कार्य के कारण सड़क का दायरा सिमटकर महज 3 मीटर रह गया है, जो किसी भी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है।
बिना सुरक्षा के जोखिम भरा सफर ब्रिज निर्माण के लिए सड़क के दोनों ओर गहरी खुदाई की गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस खतरनाक खुदाई के बावजूद मौके पर सुरक्षा के लिए कोई बैरिकेडिंग नहीं है। न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगा है और न ही संकेतक, जिससे राहगीर अनजाने में हादसे का शिकार हो सकते हैं।
बारिश ने बढ़ाई मुसीबत लगातार हो रही बारिश के कारण निर्माण स्थल की स्थिति और भी बदतर हो गई है। खुदाई के चलते मिट्टी लगातार धंस रही है, जिससे सड़क पर कीचड़ और बड़े-बड़े पत्थरों का ढेर लग गया है। फिसलन के कारण दोपहिया वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ना आम बात हो गई है।
अंधेरे में बढ़ता मौत का खतरा रात के समय यह क्षेत्र किसी डरावने मोड़ से कम नहीं है। निर्माण स्थल पर रोशनी (लाइटिंग) की कोई व्यवस्था नहीं है और रेडियम संकेतक न होने के कारण गड्ढे स्पष्ट दिखाई नहीं देते। यदि कोई वाहन अनियंत्रित होता है, तो वह सीधे गहरी खुदाई वाली खाई में गिर सकता है।
आपातकालीन वाहनों की आवाजाही पर संकट यह मार्ग बेहद व्यस्त है, जहाँ से रोजाना स्कूल बसें, एंबुलेंस और सैकड़ों की संख्या में यात्री वाहन गुजरते हैं। संकरे रास्ते और दलदल जैसी स्थिति के कारण एंबुलेंस जैसे जरूरी वाहनों का निकलना भी अब एक कड़ी चुनौती बन गया है, जिससे मरीजों की जान पर भी बन आई है।
प्रशासन और ठेकेदार की घोर लापरवाही स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और रेलवे अधिकारियों से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी उन्हें बर्दाश्त नहीं। ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से बैरिकेडिंग, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और वैकल्पिक मार्ग की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
हादसे का इंतजार क्यों? ग्रामीणों का स्पष्ट मानना है कि किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार करने से बेहतर है कि प्रशासन अभी से सतर्क हो जाए। जनता ने निर्माण एजेंसी के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और सुरक्षा इंतजामों को पुख्ता करने की मांग की है, ताकि पेंड्रा का यह रास्ता फिर से सुरक्षित हो सके।
पेंड्रा के कोटमी-देवरी मार्ग पर रेलवे ब्रिज निर्माण से महज 3 मीटर रास्ता बचा है। बैरिकेडिंग, रोशनी और चेतावनी संकेतों के अभाव में हादसे का खतरा बढ़ा। pic.twitter.com/qlTllzsG3r
— Haribhoomi (@Haribhoomi95271) August 29, 2026
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