श्री कृष्ण जन्मस्थान कारसेवा स्थगित: क्या सावन की कांवड़ यात्रा बनी वजह?
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मथुरा के श्री कृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह विवाद के बीच 9 अगस्त को होने वाली प्रस्तावित कारसेवा को टाल दिया गया है। चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर संत सच्चिदानंद महाराज ने इसकी घोषणा की है।

शिला पूजन होगा नया पड़ाव कारसेवा टालने के बावजूद संत सच्चिदानंद महाराज ने अपने आश्रम में कार्यक्रम को जारी रखा है। अब विवादित स्थल पर कूच करने के बजाय, आश्रम की कार्यशाला में शिलाओं (पत्थरों) का पूजन और पाठ किया जाएगा। मंदिर निर्माण के लिए राजस्थान से पत्थरों की खेप पहले ही आश्रम पहुँच चुकी है। इस कार्यक्रम में कई प्रमुख संत और धर्माचार्य शामिल होंगे।

क्यों टला कार्यक्रम? कार्यक्रम स्थगित करने के पीछे मुख्य कारण सावन का महीना और कांवड़ यात्रा को बताया गया है। संत सच्चिदानंद महाराज ने कहा कि अखाड़ा परिषद ने यह फैसला लिया है कि कांवड़ियों को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए, इसलिए भीड़ जुटाने वाले इस कार्यक्रम को फिलहाल रोक दिया गया है।

बैकफुट पर नहीं, रणनीति बदली है 4 जुलाई को एक धक्का दो का आक्रामक नारा देने वाले महाराज ने स्पष्ट किया कि वे बैकफुट पर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह कारसेवा का ही प्रथम चरण है, जिसे भूमिपूजन के रूप में देखा जाना चाहिए। वे इसे पीछे हटना नहीं, बल्कि संतों के मार्गदर्शन में लिया गया एक संयमपूर्ण निर्णय मानते हैं।

कानूनी पेच और मुस्लिम पक्ष पर आरोप संत सच्चिदानंद महाराज ने शाही ईदगाह पक्ष पर केस को जानबूझकर उलझाने का आरोप लगाया है। उन्होंने 1991 के प्लेसिस ऑफ वर्शिप एक्ट के इस्तेमाल को गलत बताते हुए कहा कि मुस्लिम पक्ष के पास कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने 1968 के समझौते पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों ने समझौता किया, उनका श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट से कोई आधिकारिक संबंध नहीं था।

सुनवाई में देरी पर जताई नाराजगी महाराज ने मांग की है कि इस मामले में कोर्ट को रोजाना सुनवाई करनी चाहिए। उनका तर्क है कि चूंकि केंद्र और राज्य में एक ही विचारधारा की सरकार है, इसलिए मंदिर मुक्ति के लिए यह सबसे अनुकूल समय है। फिलहाल, कानूनी लड़ाई और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मथुरा का यह विवाद एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में है।

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