क्या इस्लामिक NATO से बदल जाएगी दुनिया की सुरक्षा तस्वीर? भारत-इज़राइल के लिए नई चुनौती!
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सऊदी अरब और तुर्की के साथ मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बड़े सैन्य गठबंधन का खाका पेश किया है। उन्होंने मुस्लिम देशों को एकजुट होकर इस्लामिक NATO बनाने का आह्वान किया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति में खलबली मचा दी है।

मक्का समझौता: NATO जैसी सैन्य ताकत सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुआ यह त्रिपक्षीय रक्षा समझौता बेहद अहम है। इसके तहत साझा सुरक्षा का सिद्धांत अपनाया गया है, जो बिल्कुल NATO के आर्टिकल 5 जैसा है। इसका मतलब है कि अगर इन तीनों में से किसी एक भी देश पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और वे संयुक्त सैन्य कार्रवाई करेंगे।

इस्लामिक NATO का विस्तार रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने केवल इन तीन देशों तक सीमित न रहकर, अन्य मुस्लिम देशों को भी इस मंच से जुड़ने की अपील की है। उनका तर्क है कि मुस्लिम बहुल देशों को अपने आपसी मतभेद भुलाकर एक मजबूत सैन्य शक्ति के रूप में उभरना चाहिए ताकि वे अपनी सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित कर सकें।

भारत और इज़राइल पर सीधा निशाना ख्वाजा आसिफ ने इस प्रस्तावित गठबंधन का मुख्य उद्देश्य भारत और इज़राइल से पैदा होने वाली कथित सुरक्षा चुनौतियों को बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अफगानिस्तान के जरिए पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। हालांकि, भारत इन आरोपों को पाकिस्तान की अपनी नाकामी छुपाने की कोशिश बताकर खारिज करता रहा है।

वहीं, इज़राइल को लेकर आसिफ का रुख और भी सख्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम जगत के लिए इज़राइल की नीतियों का मुकाबला करना एक प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इज़राइल के साथ संबंधों को सामान्य करना मुस्लिम देशों के लिए कतई फायदेमंद नहीं है और फ़िलिस्तीन का समर्थन ही उनकी नीति का आधार रहेगा।

मध्य-पूर्व में जारी युद्ध और पाकिस्तान की चाल यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरा मध्य-पूर्व क्षेत्र बारूद के ढेर पर बैठा है। हाल ही में अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में युद्ध छिड़ चुका है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।

इस तनावपूर्ण माहौल का फायदा उठाकर पाकिस्तान खुद को मुस्लिम दुनिया के रक्षात्मक और कूटनीतिक नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। यह इस्लामिक NATO प्लान आने वाले समय में वैश्विक सुरक्षा समीकरणों को कितना प्रभावित करेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

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