क्या लाल किले से गूंजेगी Gen Z की आवाज़? पीएम मोदी से युवाओं ने किया सीधा सवाल
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स्वतंत्रता दिवस करीब है और लाल किले की प्राचीर से होने वाले प्रधानमंत्री के संबोधन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इस बीच, युवा कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने एक अनोखी मांग छेड़कर सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि इस बार का स्वतंत्रता दिवस भाषण औपचारिकताओं से हटकर पूरी तरह देश की Gen Z और युवाओं के भविष्य पर केंद्रित होना चाहिए।

युवाओं के लिए सरकार का रोडमैप क्या है? अभिजीत दीपके का कहना है कि अब समय आ गया है जब सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह अगली पीढ़ी के लिए क्या कर रही है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से एक सप्ताह का अभियान चलाने का आग्रह किया है, ताकि प्रधानमंत्री को यह बताया जा सके कि युवा केवल वादों से ऊपर उठकर एक ठोस फ्यूचर रोडमैप देखना चाहते हैं।

शिक्षा और बेरोजगारी पर जवाबदेही की मांग यह मांग केवल भाषण तक सीमित नहीं है। अभिजीत ने सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं कि पिछले एक दशक में शिक्षा के क्षेत्र में क्या ठोस बदलाव आए हैं? उन्होंने देश की सबसे गंभीर समस्या—बेरोजगारी—पर भी प्रधानमंत्री से विस्तृत चर्चा और भविष्य की ठोस योजनाओं का ब्योरा देने की मांग की है। उनका तर्क है कि युवाओं को अब स्पष्ट जवाब की जरूरत है, न कि केवल नारों की।

सरकार को जनता का डर जरूरी अभिजीत ने लोकतंत्र में सरकार के भीतर जनता के डर की वकालत की है। उन्होंने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और पुलिसिया कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि क्या बोलती पब्लिक जैसे कैंपेन ने सरकार को बुनियादी मुद्दों पर बात करने के लिए मजबूर किया है। उन्होंने जोर दिया कि प्रशासन को उन घटनाओं की जिम्मेदारी लेनी चाहिए जो आज सबके सामने हैं।

भाजपा और आरएसएस के विरोधाभास पर निशाना अभिजीत ने भाजपा नेतृत्व और आरएसएस के बीच के वैचारिक मतभेद पर भी तंज कसा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत युवाओं को एंटी-नेशनल नहीं कहने की सलाह देते हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा के नेता और मंत्री युवाओं को आतंकवादियों की बी टीम , वायरस या कॉकरोच जैसे शब्दों से संबोधित करते हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार को अपने मेंटर की बात माननी चाहिए और युवाओं के प्रति भाषा में सुधार लाना चाहिए।

क्या 15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री इन सवालों का जवाब देंगे? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन अभिजीत दीपके की इस मांग ने देश के युवाओं के बीच एक नई और जरूरी बहस जरूर छेड़ दी है।

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