क्या Gen-Z बन गई है भारत की नई राजनीतिक शक्ति? पीएम मोदी और राहुल गांधी की नजरें युवाओं पर
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देश की राजनीति में अब युवा शक्ति महज़ एक चुनावी नारा नहीं, बल्कि फोकस का मुख्य केंद्र बन गई है। शनिवार को दिल्ली से प्रयागराज तक जो कुछ हुआ, उसने साफ कर दिया है कि सत्ता की चाबी अब Gen-Z के पास है। एक तरफ पीएम मोदी थे तो दूसरी तरफ राहुल गांधी, दोनों के मंच और मुद्दे अलग थे, लेकिन मकसद एक ही था—युवाओं को साधना।

डिग्री सिर्फ सर्टिफिकेट नहीं, समाधान का नाम है

IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को एक अलग नजरिया दिया। उन्होंने कहा कि IIT की डिग्री महज परीक्षा पास करने का प्रमाण पत्र नहीं है, बल्कि यह कठिन समस्याओं को सुलझाने की क्षमता का प्रतीक है। पीएम ने जोर देकर कहा कि कॉलेज का सिलेबस तो तय होता है, लेकिन जिंदगी की परीक्षा अक्सर आउट ऑफ सिलेबस होती है।

नौकरी ढूंढने वाले नहीं, समाधान देने वाले बनें

प्रधानमंत्री ने युवाओं को सलाह दी कि वे केवल नौकरी खोजने वालों की भीड़ का हिस्सा न बनें। उन्होंने एआई (AI), सेमीकंडक्टर, स्पेस, ड्रोन और क्वांटम कंप्यूटिंग को भविष्य की बड़ी संभावनाएं बताया। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे पैकेज और दूसरों से तुलना करने की अंधी दौड़ से बचें, क्योंकि असली मुकाबला खुद को कल से बेहतर बनाने का है।

राहुल गांधी का छात्र संवाद और चुनावी बिसात

दूसरी ओर, प्रयागराज में राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज कार्यक्रम के जरिए युवाओं के बीच अपनी बात रखी। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सीधा संवाद किया। यह स्पष्ट है कि कांग्रेस हो या भाजपा, दोनों ही अब युवाओं की भाषा और उनकी नाराजगी को समझ रहे हैं।

क्यों Gen-Z पर दांव लगा रहे हैं नेता?

आज की राजनीति में युवा पीढ़ी का महत्व इसलिए बढ़ा है क्योंकि वे केवल मतदाता नहीं, बल्कि पॉलिटिकल नैरेटिव को बदलने वाले इन्फ्लुएंसर हैं। इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और सोशल मीडिया के जरिए यह पीढ़ी किसी भी मुद्दे को रातों-रात राष्ट्रीय बहस बना सकती है।

राजनीति अब केवल बड़ी रैलियों तक सीमित नहीं रही। वह अब स्क्रीन पर, एल्गोरिदम में और युवाओं के उन सवालों में सिमट गई है, जिनका जवाब देना अब नेताओं की प्राथमिकता बन गया है। साफ है कि जो नेता Gen-Z की नब्ज को बेहतर समझेगा, आने वाले समय में वही राजनीतिक मैदान में अपनी धाक जमा पाएगा।

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