परिसीमन पर क्या तमिलनाडु बंटा? सीएम विजय की बुलाई बैठक से DMK-AIADMK ने बनाई दूरी
News Image

तमिलनाडु में परिसीमन (Delimitation) विधेयक पर जारी सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री जोसेफ विजय द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक ने राज्य की राजनीति में नई दरार पैदा कर दी है। क्या दक्षिणी राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व पर मंडरा रहा खतरा तमिलनाडु के दलों को एकजुट कर पाएगा? बैठक की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है।

क्या है केंद्र का प्रस्ताव और चिंता? केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को लेकर तमिलनाडु सरकार चिंतित है कि इससे राज्य की संसदीय सीटों की संख्या कम हो सकती है। इसे लेकर एक साझा रुख अपनाने के लिए मुख्यमंत्री विजय ने चेन्नई में सांसदों की बैठक बुलाई थी। चिंता यह है कि यदि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों का प्रभाव संसद में घट जाएगा।

बैठक का गणित: 57 में से सिर्फ 25 सांसद पहुंचे मुख्यमंत्री की इस पहल पर राज्य के दलों में भारी मतभेद दिखा। प्रदेश के कुल 57 सांसदों में से केवल 25 ही बैठक में शामिल हुए। बैठक में मुख्य रूप से कांग्रेस (12 सांसद) और उनके सहयोगी दलों (VCK, CPI, CPI(M), MDMK, IUML) ने हिस्सा लिया। वहीं, 32 सांसद बैठक से नदारद रहे।

विपक्ष का कड़ा बहिष्कार DMK और AIADMK ने बैठक का पूरी तरह बहिष्कार किया। DMK सांसद कनिमोझी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह बैठक केवल कावेरी जल विवाद (मेकेदातु बांध) से ध्यान भटकाने की रणनीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक कोई नया संशोधित ड्राफ्ट ही सामने नहीं है, तब तक चर्चा बेमानी है। विपक्ष का तर्क है कि सरकार मुद्दे को सुलझाने के बजाय राजनीति कर रही है।

सरकार का रुख और प्रस्ताव बैठक में शामिल सहयोगी दलों ने एक प्रस्ताव पारित किया है। VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने कहा, हमारी मांग है कि केंद्र सरकार संसद की 543 सीटों की संख्या को फ्रीज कर दे और राज्यों में सीटों का मौजूदा अनुपात बनाए रखा जाए। कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने विपक्ष के बहिष्कार को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और इसे तमिलनाडु के हितों के खिलाफ बताया।

क्या है परिसीमन का असली डर? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परिसीमन जनसंख्या आधारित रहा, तो दक्षिण भारत अपनी राजनीतिक ताकत खो देगा, जबकि उत्तर भारतीय राज्यों का दबदबा बढ़ जाएगा। MDMK सांसद दुरई वाइको ने चेतावनी दी कि यह केवल सीटों का मामला नहीं, बल्कि राज्यों के वित्तीय अधिकारों और संसाधनों के बंटवारे का भी गंभीर मुद्दा है।

फिलहाल, इस बैठक के बाद तमिलनाडु की राजनीति दो स्पष्ट धड़ों में बंटी नजर आ रही है। जहां सीएम विजय इस मुद्दे पर एक व्यापक मोर्चा बनाने की कोशिश में हैं, वहीं प्रमुख विपक्षी दलों का असहयोग यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा विवाद बनने वाला है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

NTA में बड़े पदों पर भर्ती: देशभर के परीक्षा केंद्रों की कमान अब आपके हाथों में, जानें योग्यता और जिम्मेदारियां

Story 1

गौतम गंभीर के चेहरे पर आई मुस्कान, गुरनूर बराड़ की आतिशी बल्लेबाजी ने लूटी महफिल

Story 1

भारतीय क्रिकेट के लिए इंजरी अलार्म : बुमराह-हार्दिक समेत 13 खिलाड़ी चोटिल, टीम चयन में फंसी पेंच

Story 1

रांची छात्र आंदोलन: सरकार से वार्ता बेनतीजा, जयराम महतो का अनशन का ऐलान

Story 1

वॉर्मअप मैच में सिक्सर किंग बना भारतीय गेंदबाज, गौतम गंभीर का रिएक्शन हुआ वायरल

Story 1

जब IIT दिल्ली में PM मोदी ने ली चुटकी, बोले- मैं बाबा बागेश्वर नहीं, पर आपके मन में क्या चल रहा है...

Story 1

RCB के स्टार ने सुलझाई गंभीर की बड़ी उलझन, श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में जगह पक्की!

Story 1

टीम इंडिया के लिए राहत की खबर: कप्तान शुभमन गिल की चोट पर आया बड़ा अपडेट!

Story 1

यशस्वी जायसवाल की खुली पोल! श्रीलंका में फिर सामने आई सबसे बड़ी कमजोरी

Story 1

मणिपुर में शांति की बयार: तीन साल बाद नेशनल हाईवे पर दौड़ेगी बसें, सामान्य हो रहे हालात