भारत में व्यापार करना है तो कानून मानना अनिवार्य, मेटा को सरकार की दो टूक चेतावनी
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नई दिल्ली: मेटा (Meta) अब भारत में अपनी मनमानी नहीं चला पाएगा। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसी सेवाएं संचालित करने वाली इस दिग्गज कंपनी को भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि उन्हें हर हाल में भारतीय कानूनों का पालन करना होगा। लगातार मिल रही शिकायतों और संसदीय समिति की सख्ती के बाद मेटा के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग को माफी मांगनी पड़ी है, लेकिन सरकार इसे लेकर अब कोई ढील देने के मूड में नहीं है।

एल्गोरिदम पर सरकार की पैनी नजर

भारत सरकार ने मेटा के कामकाज के तौर-तरीकों, खासकर उनके एल्गोरिदम पर कड़े सवाल उठाए हैं। सरकार यह जांच रही है कि कैसे मेटा के प्लेटफॉर्म्स पर कुछ कंटेंट को जबरन प्रमोट किया जाता है और कुछ को किनारे कर दिया जाता है। मेटा की टेक्निकल टीम भारत में है और उसे डीपफेक, बाल यौन शोषण और बिना लेबल वाले एआई (AI) कंटेंट पर ठोस कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

अब 3 घंटे में हटाना होगा गैर-कानूनी कंटेंट

सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों के लिए नियम और सख्त कर दिए हैं। अब किसी भी आपत्तिजनक या गैर-कानूनी कंटेंट को सरकार या अदालत के आदेश के महज 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा। पहले इस समय सीमा का दायरा 36 घंटे का था, जिसे अब घटा दिया गया है। इसके साथ ही व्हाट्सएप की एन्क्रिप्शन पॉलिसी और डेटा शेयरिंग को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

अमेरिका में मेटा पर लगा 9,000 करोड़ का जुर्माना

मेटा की मुश्किलें केवल भारत में ही नहीं, बल्कि उसके जन्मस्थान अमेरिका में भी बढ़ गई हैं। न्यू मेक्सिको की अदालत ने मेटा को पब्लिक न्यूसेंस (सार्वजनिक उपद्रव) करार देते हुए 9,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। अदालत ने मेटा पर बच्चों को मानसिक रोगी बनाने और उनकी सुरक्षा में चूक करने का गंभीर आरोप लगाया है। अमेरिकी जज ने स्पष्ट टिप्पणी की कि जिस तरह एक फैक्ट्री को अपना प्रदूषण नियंत्रित करना होता है, वैसे ही मेटा की जिम्मेदारी है कि वह अपने प्लेटफार्म से फैलने वाले वैचारिक प्रदूषण को रोके।

मुनाफे की अंधी दौड़ और बच्चों की सेहत

मेटा का सालाना मुनाफा भारत के कुल बजट के करीब 11% के बराबर है। आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का मुनाफा 5 लाख 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। चिंता की बात यह है कि अरबों का मुनाफा कमाने वाली यह कंपनी अपने प्लेटफार्म पर ऐसा कंटेंट परोस रही है, जिससे युवाओं और बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ रहा है।

भारत का स्पष्ट रुख

भारत सरकार अब किसी भी तकनीकी बहाने को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। संदेश साफ है: यदि मेटा को भारत के विशाल बाजार में व्यापार करना है, तो उसे अमेरिकी संविधान नहीं, बल्कि भारतीय कानून का सम्मान करना होगा। सरकार अब मेटा के लिए पूर्ण जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस नीति बनाने पर काम कर रही है, ताकि युवाओं की ऊर्जा को सुरक्षित रखा जा सके।

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