जेपीएससी-जेएसएससी विवाद: बाबूलाल मरांडी का सरकार पर हमला, सीबीआई जांच और दोषियों की बर्खास्तगी की मांग
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झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्रों का आंदोलन अब और तेज हो गया है। बुधवार को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भाजपा और आजसू के विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात की। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हुई इस मुलाकात में मरांडी ने छात्रों को हर स्तर पर समर्थन देने का भरोसा दिलाया।

सीबीआई जांच और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य की परीक्षाओं में धांधली की निष्पक्ष जांच केवल सीबीआई ही कर सकती है। उन्होंने राज्य सरकार से जेपीएससी और जेएसएससी के अध्यक्ष, सचिव और परीक्षा नियंत्रक को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने और उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की। मरांडी के अनुसार, जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक युवाओं का भर्ती प्रणाली पर भरोसा नहीं लौटेगा।

नौकरियां बेचने का सुनियोजित खेल नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे मात्र पेपर लीक का मामला नहीं, बल्कि नौकरियों की खरीद-फरोख्त का एक सुनियोजित धंधा बताया। उन्होंने दावा किया कि पिछले छह वर्षों में जेपीएससी और जेएसएससी की कई भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाई गई हैं। मरांडी ने आरोप लगाया कि अभ्यर्थियों को राज्य से बाहर ले जाकर प्रश्न-पत्र रटवाए गए, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में आ गई है।

कट-ऑफ और चयन प्रक्रिया पर सवाल मरांडी ने जेपीएससी की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पहले तो कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए गए, और जब हाईकोर्ट के दबाव के बाद सूची जारी हुई, तो अनियमितताएं सामने आईं। उन्होंने दावा किया कि अधिक अंक पाने वाले मेधावी छात्र बाहर हो गए और कम अंक वाले उम्मीदवार सफल घोषित कर दिए गए।

भ्रष्टाचार का दीमक बनेगा प्रशासनिक तंत्र भाजपा नेता ने चेतावनी दी कि यदि पैसे के दम पर नौकरी पाने की इस प्रवृत्ति को नहीं रोका गया, तो यह सरकारी सिस्टम को भीतर से खोखला कर देगा। उन्होंने कहा कि जो लोग रिश्वत देकर नौकरी हासिल करेंगे, वे अगले तीन दशकों तक भ्रष्टाचार को ही बढ़ावा देंगे। इस परिपाटी को जड़ से खत्म करना प्रदेश के भविष्य के लिए अनिवार्य है।

विधानसभा में गूंजेगी छात्रों की आवाज बाबूलाल मरांडी ने सरकार की संवेदनशीलता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बारिश के बीच छात्र हफ्तों से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार सुनने के बजाय उन्हें परेशान कर रही है। मरांडी ने ऐलान किया कि इस पूरे प्रकरण को आगामी विधानसभा मानसून सत्र में मजबूती से उठाया जाएगा और सरकार को जवाबदेह बनाया जाएगा। इस दौरान सीपी सिंह, नीरा यादव और अमर कुमार बाउरी सहित कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।

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