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पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। टीएमसी में शामिल होने के महज 4 महीने के भीतर ही उन्होंने पार्टी से किनारा कर लिया है।
चापलूसों की फौज पर निशाना इस्तीफे से पहले सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बोस ने तीखे तेवर अपनाए। उन्होंने कहा, पॉलिटिकल पार्टियां चापलूसों को पसंद करती हैं। आपसे उम्मीद की जाती है कि आप पार्टी लाइन का पालन करें, भले ही आपको लगे कि नीतियां लोगों के लिए नुकसानदेह हैं।
उन्होंने आगे कहा कि आज का राजनीतिक सिस्टम नेताजी के उस मजबूत और समावेशी भारत के सपने से कोसों दूर है, जिसकी कल्पना उन्होंने की थी।
ममता बनर्जी को भेजा इस्तीफा चंद्र कुमार बोस ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को लिखे पत्र में इस्तीफे का कारण निजी बताया है। उन्होंने पार्टी को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए सोमवार को अपनी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। गौरतलब है कि उन्होंने इसी साल अप्रैल में टीएमसी का दामन थामा था।
भाजपा से भी हो चुके हैं अलग बोस का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2016 में भाजपा में शामिल होने वाले बोस ने सितंबर 2023 में पार्टी का साथ छोड़ दिया था। तब उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा नेताजी और शरत चंद्र बोस की समावेशी विचारधारा को बढ़ावा देने में विफल रही है।
आगे की राह: आजाद हिंद पार्टी का थामेंगे हाथ अपनी भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए चंद्र कुमार बोस ने स्पष्ट किया कि अब वह युवा राजनीतिक दल आजाद हिंद पार्टी के मेंटर के तौर पर काम करेंगे। यह पार्टी 21 अक्टूबर को कटक से लॉन्च होगी। यह तारीख ऐतिहासिक है, क्योंकि इसी दिन नेताजी ने आजाद भारत की प्रोविजनल सरकार बनाने का ऐलान किया था।
संसद में एंटी-पेपर लीक कानून पर चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस लड़ाई को किसी पार्टी विशेष की नहीं, बल्कि मेरिट बनाम माफिया की लड़ाई करार दिया है।
समाधान के लिए ठोस बदलाव जरूरी चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का हल केवल बयानबाजी या आश्वासन देने से नहीं होगा। इसके लिए एक मजबूत संस्थागत व्यवस्था की सख्त जरूरत है। उन्होंने देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों का विश्वास फिर से बहाल करने पर जोर दिया है।
सांसद ने स्पष्ट किया कि सरकार जो नया एंटी-पेपर लीक फ्रेमवर्क ला रही है, उसे पूरी तरह से प्रभावी बनाना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले माफिया तंत्र को पूरी तरह से जड़ से उखाड़ना ही एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए।
*Political parties prefer sycophants! You are expected to follow the party line even if you feel the policies are detrimental towards the welfare of the people.#79YearsIndependence , but our leaders & political system are a far cry away from building Netaji s inclusive strong… pic.twitter.com/WbPc0XL4st
— Chandra Kumar Bose (@Chandrakbose) August 3, 2026
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