आतंकवाद खत्म होने के दावे खोखले? फारूक अब्दुल्ला ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए बड़े सवाल
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जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुई लक्षित हत्याओं (Targeted Killings) ने सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में एक पुलिस कांस्टेबल की हत्या और दो प्रवासी मजदूरों पर हुए हमले के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार के दावों पर कड़ा प्रहार किया है।

अगर आतंकवाद खत्म हो गया, तो ये हमलावर कौन हैं? फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से सीधा सवाल किया कि यदि घाटी से आतंकवाद का पूरी तरह सफाया हो चुका है, तो फिर ये हमले कौन कर रहा है? उन्होंने कहा, आप दावा करते हैं कि आतंकवाद खत्म हो गया है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सीमा पार से हो रही घुसपैठ और हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।

सीमा सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल पूर्व मुख्यमंत्री ने सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। फारूक अब्दुल्ला ने पूछा, अगर पूरी सीमा नियंत्रण में है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं, तो ये हमलावर आखिर आ कहां से रहे हैं? यह सुरक्षा में बड़ी चूक का संकेत है।

अनुच्छेद 370 और पुराने वादों की याद केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने 2019 के घटनाक्रम को याद किया। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाते समय वादा किया गया था कि स्थिति बदलेगी और आतंकवाद खत्म होगा। लेकिन पांच साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि केंद्र के वादे जमीन पर खरे नहीं उतर रहे हैं।

अधिकार और सम्मान की बहाली है प्राथमिकता फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के लिए पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को फिर दोहराया। उन्होंने कहा, हम सिर्फ अपने अधिकार और सम्मान की वापसी चाहते हैं। वर्तमान सरकार जिस तरह से केंद्रशासित प्रदेश के रूप में काम कर रही है, वह यहां की जनता की आकांक्षाओं को पूरा नहीं करती।

लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस अब केंद्र सरकार पर और अधिक दबाव बनाने की रणनीति बना रही है, ताकि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के साथ-साथ राजनीतिक अधिकारों को बहाल किया जा सके।

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