पर्वतारोहण के युग का अंत: 14 चोटियों को फतह करने वाले निम्सदाई निर्मल पुर्जा का दुखद निधन
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पर्वतारोहण की दुनिया ने अपना सबसे चमकता हुआ सितारा खो दिया है। महज 43 साल की उम्र में दुनिया भर के क्लाइंबर्स के प्रेरणास्रोत रहे ब्रिटिश-नेपाली पर्वतारोही निर्मल निम्सदाई पुर्जा अब हमारे बीच नहीं रहे। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी ब्रॉड पीक पर आए एक भयावह बर्फीले तूफान (एवलांच) में दबकर उनकी दर्दनाक मौत हो गई।

हादसे का मंजर: जीपीएस से मिली अंतिम लोकेशन

निर्मल पुर्जा की कंपनी एलीट एक्सपेड ने इस दुखद घटना की पुष्टि की है। इस हादसे में उनके दो भरोसेमंद नेपाली साथी, पुर बहादुर गुरुंग (युक्ता) और निमा शेर्पा की भी जान चली गई।

जीपीएस ट्रैकर के डेटा से पता चला कि ब्रॉड पीक के वेस्ट रिज रूट पर करीब 6,580 मीटर की ऊंचाई पर अचानक उनका संपर्क टूट गया। ट्रैकर पर ऊंचाई में आई अचानक गिरावट से साफ था कि पूरी टीम बर्फीले तूफान की चपेट में आ गई थी। खराब मौसम के बावजूद राहत दलों ने बाद में उनके शव बरामद किए।

गरीबी से स्पेशल फोर्स तक का संघर्ष

निर्मल पुर्जा का जन्म 25 जुलाई 1983 को नेपाल के म्याग्दी जिले के एक सामान्य परिवार में हुआ था। बचपन में आर्थिक तंगी इतनी थी कि उनके पास पहनने के लिए चप्पल तक नहीं थी।

अनुशासन उनके रगों में था। 2003 में वे ब्रिटिश सेना की गोरखा ब्रिगेड में शामिल हुए और 2009 में रॉयल नेवी की एलीट यूनिट स्पेशल बोट सर्विस (SBS) में जगह बनाने वाले पहले गोरखा बने। 16 साल की सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने मौत को बेहद करीब से देखा था।

प्रोजेक्ट पॉसिबल और असंभव का सच होना

निर्मल कभी पेशेवर पर्वतारोही नहीं बनना चाहते थे। 2012 में एक साधारण ट्रेकिंग ट्रिप ने उनकी जिंदगी बदल दी। 2018 में उन्होंने अपनी पक्की सरकारी नौकरी और पेंशन छोड़ दी, ताकि वे पहाड़ों के सपनों को पूरा कर सकें।

2019 में उन्होंने प्रोजेक्ट पॉसिबल के तहत दुनिया की सभी 14 सबसे ऊंची चोटियों को महज 6 महीने और 6 दिनों में फतह कर इतिहास रच दिया। इस सफर के लिए उन्होंने अपना घर तक गिरवी रख दिया था। उनकी यह साहसिक यात्रा नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री 14 Peaks: Nothing Is Impossible में अमर हो गई।

रिकॉर्ड्स की ऐसी फेहरिस्त जो शायद ही कोई तोड़ पाए

निर्मल केवल रफ्तार के लिए नहीं, बल्कि अपनी तकनीकी कुशलता के लिए जाने जाते थे:

ब्रॉड पीक पर आई आपदा ने भले ही इस निडर योद्धा की सांसें थाम दी हों, लेकिन निर्मल निम्सदाई पुर्जा का नाम पर्वत शिखर पर हमेशा एक ऐसे व्यक्ति के रूप में गूंजता रहेगा, जिसने साबित किया कि इंसान की सोच ही उसके सपनों की एकमात्र सीमा है।

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