सिर पर कफन बांधकर निकलता हूं , पप्पू यादव पर FIR के बाद मची हलचल; क्या जेल जाएंगे पूर्णिया सांसद?
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पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक विवाद के केंद्र में हैं। अयोध्या राम मंदिर में कथित अनियमितताओं को लेकर संसद परिसर में किए गए विरोध प्रदर्शन और सांकेतिक नाटक के बाद वाराणसी में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस कार्रवाई ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या पप्पू यादव को जेल जाना पड़ेगा?

एफआईआर से डरने वाले नहीं : पप्पू यादव वाराणसी के कोतवाली थाने में हुई एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए पप्पू यादव ने आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा, सनातन किसी एक दल की बपौती नहीं है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसी बड़ी हस्तियां नहीं डरीं, तो पप्पू यादव कैसे डरेगा? मैं हर दिन सिर पर कफन बांधकर घर से निकलता हूं। अगर भारत की आस्था की रक्षा के लिए मुझे अपनी जान भी देनी पड़े, तो मैं तैयार हूं।

क्या संसद परिसर की घटना पर FIR मान्य है? कानूनी जानकारों के अनुसार, यह मामला पेचीदा है। संविधान के अनुच्छेद 105(2) के तहत सांसदों को सदन के भीतर उनके कार्यों और भाषणों के लिए कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। संसद परिसर का क्षेत्राधिकार लोकसभा अध्यक्ष के पास होता है। बाहरी पुलिस का सीधे तौर पर संसद के अंदर हुए कृत्य पर संज्ञान लेना संवैधानिक विशेषाधिकार का उल्लंघन माना जा सकता है।

क्या गिरफ्तारी की है संभावना? वाराणसी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 299 और 302 के तहत मामला दर्ज किया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, 7 साल से कम सजा वाले मामलों में तत्काल गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। पुलिस को पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए नोटिस भेजना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में तत्काल गिरफ्तारी की संभावना लगभग नगण्य है।

आगे क्या होगी कानूनी राह? इस मामले के तीन मुख्य पहलू हो सकते हैं:

  1. लोकसभा स्पीकर की भूमिका: बिना संसद अध्यक्ष की अनुमति के पुलिस कोई भी कार्रवाई करने से पहले कानूनी अड़चनों में फंस सकती है।
  2. हाईकोर्ट का रुख: पप्पू यादव और अन्य आरोपी सांसद एफआईआर को रद्द कराने या अग्रिम जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
  3. राजनीतिक दांव-पेच: चुनाव नजदीक होने के कारण विपक्षी गठबंधन इसे तानाशाही के खिलाफ लड़ाई बता रहा है, जबकि बीजेपी इसे सनातन के अपमान के तौर पर भुना रही है।

कुल मिलाकर, फिलहाल पप्पू यादव की गिरफ्तारी की कोई ठोस कानूनी संभावना नहीं दिख रही है। यह पूरा प्रकरण कानूनी से ज्यादा राजनीतिक दांव-पेच और विचारधाराओं की लड़ाई के रूप में सामने आया है।

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