कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारत के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ है। ग्लास्गो में भारतीय मुक्केबाजों ने अपनी आक्रामकता और शानदार तकनीक के दम पर कुल 7 स्वर्ण पदक जीतकर खेल जगत में तहलका मचा दिया है। भारत अब पदक तालिका में 38 पदकों के साथ चौथे स्थान पर मजबूती से खड़ा है।
आइए जानते हैं उन सात भारतीय खिलाड़ियों के बारे में, जिनकी मुक्कों की धमक ने दुनिया भर में तिरंगे का मान बढ़ाया है:
भिवानी की रहने वाली जैस्मिन ने अपने अनुभव का परिचय देते हुए गोल्ड मेडल जीता। महान मुक्केबाज हवा सिंह की पड़पोती जैस्मिन ने बड़ी मुक्केबाजों को मात देकर 2022 के कांस्य पदक के सूखे को स्वर्ण में बदला। पेरिस ओलंपिक की निराशा को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने अपनी तकनीक में बड़े बदलाव किए और विश्व चैंपियन का दर्जा हासिल किया।
भारतीय सेना में नायब सूबेदार प्रीति पवार ने साबित कर दिया कि वे भारतीय मुक्केबाजी का भविष्य हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एशियाई खेलों और वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में अपना लोहा मनवाने वाली प्रीति ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी स्वर्ण जीतकर अपनी बादशाहत कायम की।
युवा मुक्केबाज अंकुश ने अपने पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पर कब्जा किया। अपनी फिटनेस और आक्रामक खेल शैली के लिए पहचाने जाने वाले अंकुश ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप और वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में लगातार सफलता प्राप्त कर खुद को भारत के भरोसेमंद मुक्केबाजों की सूची में शामिल कर लिया है।
बास्केटबॉल से करियर शुरू करने वाली अरुंधति आज मुक्केबाजी की स्टार हैं। राजस्थान की पहली महिला विश्व युवा चैंपियन अरुंधति का जुझारूपन उनकी सबसे बड़ी ताकत है। सेमीफाइनल में वेल्स की दिग्गज मुक्केबाज को हराने के बाद फाइनल में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
भारतीय दल की सबसे युवा गोल्ड मेडलिस्ट प्रिया ने बेहद कम समय में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। 60 किलोग्राम भार वर्ग में उन्होंने चीन की पूर्व विश्व चैंपियन को हराकर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया। यह जीत युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
साक्षी की सफलता एक कमबैक की शानदार कहानी है। कंधे की गंभीर चोट के कारण वे लंबे समय तक खेल से दूर रहीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 54 किग्रा से 51 किग्रा वर्ग में शिफ्ट होने का जोखिम उठाया और निखत जरीन जैसी धुरंधरों को पछाड़ते हुए ग्लास्गो का टिकट कटाया और अंततः स्वर्ण पदक जीता।
भिवानी के किसान परिवार से आने वाले सचिन ने कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। जूनियर और युवा स्तर पर अपनी पहचान बनाने के बाद सचिन ने पिछले दो वर्षों में खुद को एक बेहतरीन सीनियर मुक्केबाज के रूप में विकसित किया है। कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
*Many congratulations to Sachin Siwach on clinching Gold in the Men s 60Kg Boxing event at the #CWG2026.
— Rajesh Chudasama (@rajeshchudasma) August 1, 2026
The nation salutes your perseverance, discipline and remarkable talent.
Jai Hind 🇮🇳 pic.twitter.com/2KHceDZZ7x
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