कुलगाम में दो हिंदू मजदूरों की हत्या पर मचा सियासी बवाल, सुरक्षा तंत्र की विफलता पर उठे सवाल
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जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों द्वारा छत्तीसगढ़ के दो हिंदू मजदूरों की टारगेट किलिंग ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। विकास कार्य के लिए राज्य आए इन बेगुनाह मजदूरों की हत्या के बाद घाटी से लेकर दिल्ली तक सियासी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।

उमर अब्दुल्ला सरकार ने सुरक्षा पर उठाए सवाल जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस हमले को शर्मनाक करार दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए यहां आए, उन्हें निशाना बनाना कायराना हरकत है। वहीं, उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र चौधरी ने सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब अमरनाथ यात्रा के चलते पूरा राज्य हाई अलर्ट पर है, तो आतंकी खुलेआम वारदात को अंजाम देने में कैसे कामयाब रहे? उन्होंने घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

जब राज्य का दर्जा मांगते हैं, तभी हमले क्यों? उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला दोनों ने एक अहम सवाल उठाया है—क्या इन हमलों का कोई गहरा सियासी एजेंडा है? फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जब-जब राज्य का दर्जा बहाली की मांग जोर पकड़ती है, तब-तब ऐसे आतंकी हमले क्यों होते हैं? उन्होंने इस साजिश की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।

विपक्ष का हमला: सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इसे सुरक्षा में भारी चूक बताया है। उन्होंने कहा कि निहत्थे मजदूरों को निशाना बनाना अकल्पनीय क्रूरता है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

राहुल-प्रियंका का तीखा प्रहार कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वहीं, प्रियंका गांधी ने इसे घिनौनी और अमानवीय हरकत बताया। उन्होंने कहा कि ईंट भट्ठे पर काम कर रहे मजदूरों को चुन-चुनकर मारना आतंकवाद का घृणित चेहरा है।

इस्लाम के खिलाफ है यह हिंसा: मीरवाइज मीरवाइज-ए-कश्मीर मौलवी मोहम्मद उमर फारूक ने भी इस हमले की निंदा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम बेगुनाह इंसान की जान लेने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने कहा कि गरीब मजदूरों को निशाना बनाना मानवीय मूल्यों और इस्लाम की शिक्षाओं के पूरी तरह खिलाफ है।

फिलहाल, इस घटना ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है, जहां केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय और खुफिया तंत्र की विफलता चर्चा के केंद्र में है।

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