रिंग में गोल्डन मुक्का: कभी नापसंद था बॉक्सिंग का खेल, अब प्रीति पवार ने रचा इतिहास
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कॉमनवेल्थ गेम्स में दिखा भारतीय मुक्केबाज का दम भारतीय मुक्केबाज प्रीति पवार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 54 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। फाइनल मुकाबले में उन्होंने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को एकतरफा मुकाबले में मात दी।

मैच पर पूरी तरह हावी रहीं प्रीति मैच के तीनों राउंड में प्रीति का दबदबा कायम रहा। उन्होंने अपने सटीक लेफ्ट हुक और पावरफुल राइट हैंड पंच से प्रतिद्वंद्वी को संभलने का कोई मौका नहीं दिया। पांचों जजों ने सर्वसम्मति से प्रीति के पक्ष में 10-8 का फैसला सुनाया, जिससे भारत को दिन का पहला स्वर्ण पदक मिला।

रोहतक में जश्न का माहौल प्रीति की इस शानदार जीत के बाद उनके गृह नगर रोहतक में खुशी की लहर दौड़ गई। उनकी मां और बहन की आंखों में खुशी के आंसू थे। परिवार ने मिठाई बांटकर इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया। उन्होंने इस उपलब्धि को प्रीति की सालों की कड़ी मेहनत और अनुशासन का परिणाम बताया।

चाचा की जिद से शुरू हुआ गोल्डन सफर दिलचस्प बात यह है कि प्रीति की सफलता की कहानी आसानी से शुरू नहीं हुई थी। उनकी मां ने खुलासा किया कि शुरुआत में प्रीति को बॉक्सिंग में कोई दिलचस्पी नहीं थी। वह इस खेल से दूर रहना चाहती थीं।

परिवार की मानें तो उनके चाचा, जो खुद एक बॉक्सिंग कोच हैं, के कहने पर ही प्रीति ने पहली बार ग्लव्स पहने थे। चाचा के मार्गदर्शन और परिवार के भरोसे ने प्रीति के अंदर छिपी प्रतिभा को तराशा। आज वही प्रीति विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर काबिज होकर देश का मान बढ़ा रही हैं।

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