कुवैत स्थित अमेरिकी एयर बेस पर ईरान का ड्रोन हमला, मध्य पूर्व में भड़की तनाव की आग
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तेहरान का बड़ा दावा ईरान ने शुक्रवार, 31 जुलाई की सुबह एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि उसने कुवैत में स्थित अमेरिकी अहमद अल-जाबेर एयर बेस पर ड्रोन हमला किया है। ईरानी सेना के अनुसार, इस हमले में अमेरिकी लड़ाकू विमानों के शेल्टर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम और महत्वपूर्ण उपकरणों को निशाना बनाया गया। यह घटनाक्रम युद्ध के 153वें दिन उस समय सामने आया है, जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ता तनाव चरम पर है।

हमले का कारण: केशम द्वीप का बदला ईरान का कहना है कि यह सैन्य कार्रवाई केशम द्वीप पर हाल ही में हुए अमेरिकी हमले का सीधा जवाब है। इस हमले में एक नागरिक के घर को निशाना बनाया गया था, जिसमें एक टैक्सी ड्राइवर, उसकी पत्नी और उनके दो साल के मासूम बच्चे की मौत हो गई थी। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ऐसे हमलों ने ईरान के प्रतिरोध को और अधिक मजबूत कर दिया है।

अमेरिका की चुप्पी और पेंटागन की समीक्षा ईरान के इस दावे पर अभी तक अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। हालांकि, पेंटागन के सूत्रों के अनुसार, अमेरिका कुवैत में अपनी सैन्य तैनाती की समीक्षा कर रहा है। यह प्रक्रिया युद्ध शुरू होने से पहले ही चल रही थी, लेकिन ईरान द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों के बाद अब इसे और भी अधिक गंभीरता से लिया जा रहा है।

अधिकतम दबाव की नीति पर कायम वाशिंगटन ईरान के दावों और क्षेत्रीय अस्थिरता के बावजूद, अमेरिका ने अपनी अधिकतम दबाव (Maximum Pressure) की नीति को जारी रखने का स्पष्ट संकेत दिया है। अमेरिकी सीनेट ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों को रोकने संबंधी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिससे साफ है कि अमेरिका फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और शिपिंग पर असर क्षेत्रीय तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर गहरा प्रभाव पड़ा है। डेटा के अनुसार, वहां जहाजों का प्रवेश काफी कम हो गया है। हालांकि, कुछ जहाजों द्वारा अपने ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर गुजरने की भी खबरें हैं। वर्तमान में, ओमान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कूटनीतिक बातचीत जारी है, ताकि तनाव को काबू में किया जा सके।

मिस्र के मामले में ईरान की सफाई ईरान ने मिस्र के डामिएटा बंदरगाह पर हुए जहाजों के हमलों में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है। विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने मिस्र को एक महत्वपूर्ण मित्र बताते हुए कहा कि ईरान मिस्र की संप्रभुता का पूरा सम्मान करता है और उसकी सुरक्षा ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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