शहजाद पूनावाला का BJP से इस्तीफा: टीवी की दहलीज से राजनीति के संन्यास तक का सफर
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भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुखर राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। टीवी डिबेट्स में सरकार का पक्ष मजबूती से रखने वाले पूनावाला के इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। हालांकि, इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन उन्होंने नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंपकर सक्रिय राजनीति छोड़ने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं।

इस्तीफे की वजह और भविष्य की राह

शहजाद पूनावाला ने अपने इस्तीफे में निजी कारणों का हवाला दिया है। सूत्रों के अनुसार, वे जल्द ही इस पर विस्तृत बयान जारी करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि इस्तीफे से एक दिन पहले ही उन्होंने एक पुराना इंटरव्यू साझा कर राजनीति से दूरी बनाने की इच्छा जताई थी। उन्होंने बताया था कि 18-19 साल के लंबे राजनीतिक करियर के बाद अब वे अपने जीवन के अगले अध्याय की ओर बढ़ना चाहते हैं।

PM मोदी के आजीवन अनुयायी

शहजाद के सोशल मीडिया प्रोफाइल में आए बदलाव भी उनके फैसले की पुष्टि करते हैं। उनके X (ट्विटर) बायो से BJP का नाम हट चुका है, जबकि उन्होंने स्वयं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आजीवन अनुयायी बताया है। यह स्पष्ट करता है कि विचारधारा बदलने का सवाल नहीं है, बल्कि वे चुनावी राजनीति से खुद को मुक्त करना चाहते हैं।

कांग्रेस से BJP तक का सफर

पूनावाला का राजनीतिक सफर 2008 में कांग्रेस से शुरू हुआ था। वे NSUI और AICC की मीडिया टीम में सक्रिय रहे। हालांकि, 2017 में राहुल गांधी के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव को धांधलीपूर्ण बताते हुए चुनौती देना उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बना। इसी दौरान PM मोदी ने उनके साहस की तारीफ की थी, जिसके बाद उन्होंने BJP का दामन थाम लिया था।

एक आक्रामक चेहरा और पहचान

38 वर्षीय शहजाद पूनावाला पेशे से एक वकील और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता भी रहे हैं। टीवी डिबेट्स में अपनी आक्रामक शैली और तर्कपूर्ण बचाव के लिए वे BJP के सबसे चर्चित चेहरों में से एक रहे। उन्होंने आवास में होने वाले सांप्रदायिक भेदभाव जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी कानूनी लड़ाइयाँ लड़ी हैं।

गांधी परिवार से पारिवारिक जुड़ाव

दिलचस्प तथ्य यह है कि शहजाद के भाई तहसीन पूनावाला कांग्रेस समर्थक हैं। तहसीन की शादी रॉबर्ट वाड्रा की चचेरी बहन मोनिका वाड्रा से हुई है, जिससे उनका गांधी-वाड्रा परिवार के साथ भी व्यक्तिगत जुड़ाव रहा है। परिवार में अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के बावजूद शहजाद ने हमेशा अपनी एक अलग पहचान बनाई।

फिलहाल, अब सबकी नजरें उनके विस्तृत बयान पर टिकी हैं। क्या वाकई शहजाद पूनावाला राजनीति को हमेशा के लिए अलविदा कह देंगे, या यह उनके किसी नए सफर की शुरुआत है? यह समय ही बताएगा।

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