पापा की वर्दी खून से सनी थी : जंतर-मंतर पर पुलिस पर हुए हमले का दर्द, परिजनों ने बयां की आपबीती
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवारों ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घटना की भयावह सच्चाई साझा की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन उग्र रूप ले चुका था और पुलिसकर्मियों को जानबूझकर निशाना बनाया गया।

मेरे पिता को अपराधी कहा गया एक घायल सब-इंस्पेक्टर (SI) की बेटी ने बताया कि उनके पिता ड्यूटी के दौरान मुख्य बैरिकेड पर तैनात थे। उन्होंने बताया कि 25 जुलाई को भीड़ ने उनके पिता को घसीटकर मारने की कोशिश की। अस्पताल में होश आने के बाद जब पिता घर लौटे, तो उनकी वर्दी पूरी तरह खून से सनी थी। बेटी ने रोते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर उनके पिता को क्रिमिनल कहा गया, जिसने उन्हें न्याय के लिए आगे आने को मजबूर कर दिया।

वीरता पुरस्कार पाने वाले अधिकारी पर भी हमला घायल असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) के बेटे लक्ष्य सिंह बिष्ट ने बताया कि उनके पिता को चार बार वीरता सम्मान मिल चुका है। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने बताया कि भीड़ ने बिना किसी उकसावे के पथराव शुरू कर दिया था। वरिष्ठ अधिकारियों को सुरक्षित निकालने के प्रयास में उनके पिता के सिर पर पत्थर लगा, जिससे उन्हें गंभीर चोट आई और सिर में टांके लगाने पड़े।

33 साल की सेवा, फिर भी पत्थरबाजी का शिकार एक अन्य घायल ASI की पत्नी ने बताया कि उनके पति पिछले 33 वर्षों से दिल्ली पुलिस में सेवा दे रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान शरारती तत्वों ने गमले, पत्थर और जूते तक पुलिसकर्मियों पर फेंके। उन्होंने कहा कि संसद की सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड्स को तोड़ना अराजकता को दर्शाता है।

दिल्ली सरकार का रुख: दोषियों पर होगी कार्रवाई इस घटना के बीच दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि सीजेपी (CJP) प्रदर्शन से जुड़े मामलों में दर्ज 13 एफआईआर में से सामान्य प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाएगा। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

पीड़ित परिवारों ने मांग की है कि ड्यूटी पर तैनात कर्मियों पर हमला करने वाले उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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