बीजेपी नेता की बेटी का खुला विद्रोह: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माफी नहीं, बल्कि खुद को शहीद दिखाने की कोशिश
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उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सदर से बीजेपी के पूर्व विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह इन दिनों चर्चा के केंद्र में हैं। एक कॉन्टेंट क्रिएटर यशस्विनी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्रों के विरोध प्रदर्शन का खुलकर समर्थन किया है।

इस्तीफे पर कड़ा प्रहार हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान से बातचीत में यशस्विनी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा पछतावे जैसा बिल्कुल नहीं था, बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें शहीद की तरह पेश किया जा रहा हो।

प्रह्लाद जोशी पर भी कसा तंज यशस्विनी ने धर्मेंद्र प्रधान की जगह प्रह्लाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री बनाए जाने को एक मजाक करार दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बदलाव किए गए हैं, वे जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हैं।

सोशल मीडिया का मास्टरस्ट्रोक यशस्विनी ने CJP के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि इस आंदोलन ने जिस तरह से इंस्टाग्राम और मीम्स का इस्तेमाल कर युवाओं को जोड़ा है, वह काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने माना कि आज की पीढ़ी (Gen Z) के लिए यह एक प्रभावी जरिया बन गया है।

पिता से अलग है विचारधारा अपने पिता से वैचारिक मतभेदों पर बात करते हुए यशस्विनी ने स्पष्ट किया कि वह राजनीति के मुद्दों पर घर में बात नहीं करतीं। उन्होंने कहा कि वह आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं और अपने सिद्धांतों पर बिना किसी डर के बोल सकती हैं। उन्होंने खुद को हिप्पोक्रेट (पाखंडी) होने से दूर बताते हुए कहा कि वह अपने विचारों के प्रति पूरी तरह पारदर्शी हैं।

बढ़ती जा रही है लिस्ट यशस्विनी से पहले भी कई बड़े नेताओं के बच्चे सरकार के खिलाफ खुलकर सामने आए हैं। इनमें बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सचिन रहर और असम के मंत्री केशव मंहता की बेटी दिबिसा महंता शामिल हैं।

हालांकि, इस पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बचाव करते हुए कहा था कि बच्चों की गतिविधियों और उनके विचारों के लिए उनके माता-पिता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। बहरहाल, बीजेपी नेताओं के परिवारों से आ रहे ये बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

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