राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस के भीतर एक नया सियासी तूफान उठता दिख रहा है। अब तक सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच की वर्चस्व की जंग सुर्खियों में रहती थी, लेकिन अब पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच बढ़ती दूरियां चर्चा का विषय बन गई हैं।
गहलोत के घर ‘शक्ति प्रदर्शन’ और नारे गुरुवार को पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया के नेतृत्व में करीब 309 बीएपी कार्यकर्ता पूर्व सीएम अशोक गहलोत के सिविल लाइंस स्थित आवास पर पहुंचे। इस दौरान समर्थकों ने चौथी बार गहलोत सरकार और हमारा मुख्यमंत्री कैसा हो, अशोक गहलोत जैसा हो के नारे लगाए। गहलोत ने समर्थकों का अभिवादन तो किया, लेकिन इस दौरान माहौल पूरी तरह से डोटासरा के नियंत्रण से बाहर नजर आया।
डोटासरा का कड़ा रुख: व्यक्तिगत ब्रांडिंग बंद करें जब यही कार्यकर्ता पीसीसी (प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय) पहुंचे, तो वहां भी नारेबाजी जारी रही। इसी बीच गोविंद सिंह डोटासरा ने महेंद्रजीत सिंह मालवीया के हाथ से माइक लेकर दो टूक कह दिया कि यहां मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत नारे नहीं लगेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी के व्यक्तिगत ब्रांडिंग के लिए काम नहीं करते, बल्कि सिर्फ कांग्रेस के लिए समर्पित हैं।
मालवीया को नसीहत और खुली चुनौती डोटासरा ने महेंद्रजीत सिंह मालवीया पर निशाना साधते हुए कहा कि वे बीजेपी में अपनी दाल नहीं गला सके, न विधायक बने और न सांसद। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, अगर मालवीया को कोई गलतफहमी है तो वे फिर पार्टी बदल लें, लेकिन चुनाव जीतना अब नामुमकिन है। मैंने पहले भी उन्हें हराने का चैलेंज दिया था और उन्हें हराया भी है।
क्या डोटासरा अब गहलोत की छाया से बाहर हैं? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कभी गहलोत के बेहद करीबी माने जाने वाले डोटासरा अब खुद को स्वतंत्र नेतृत्व के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। उनका यह आक्रामक रुख बताता है कि वे अब आलाकमान के सामने केवल गहलोत के सिपाही के रूप में नहीं, बल्कि प्रदेश कांग्रेस के स्वतंत्र सेनापति के तौर पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।
कांग्रेस के लिए बढ़ता त्रिकोणीय खतरा राजस्थान कांग्रेस पहले ही पायलट-गहलोत की गुटबाजी से जूझ रही है। अब डोटासरा की बढ़ती महत्वाकांक्षा ने पार्टी के अंदर एक त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति पैदा कर दी है। क्या यह गुटबाजी राजस्थान में कांग्रेस को और कमजोर करेगी, या फिर यह डोटासरा की नई सियासी पारी की शुरुआत है? आने वाले निकाय और पंचायत चुनाव ही बताएंगे कि कांग्रेस इस आंतरिक कलह से कैसे निपटती है।
उन तमाम लोगों पर धिक्कार है… जो राजनीतिक द्वेषतापूर्वक मुझ पर अनर्गल आरोप लगाते हैं... और लगवाते हैं।
— Govind Singh Dotasra (@GovindDotasra) July 30, 2026
अगर 5 साल में भी आरोप साबित नहीं कर पाए.. तो लानत है ऐसे लोगों पर जो मेरी छवि धूमिल करने के लिए दिन-रात षड्यंत्र करते हैं।
मैं चुनौती देता हूं.. अगर हिम्मत है तो मुझ पर… pic.twitter.com/p9DsuBbMYu
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