आदिपुरुष की गलतियों से सीख, रामायण ने खड़ा किया नया मानक: क्या रणबीर-यश की फिल्म बदल देगी भारतीय सिनेमा का चेहरा?
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नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण का ट्रेलर रिलीज होते ही इंटरनेट पर छा गया है। इस भव्य झलक के सामने आते ही सोशल मीडिया पर 2023 की फिल्म आदिपुरुष को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दोनों फिल्में एक ही महाकाव्य पर आधारित हैं, लेकिन ट्रेलर में दिख रहा अंतर जमीन-आसमान का है।

श्रीराम: योद्धा बनाम मर्यादा पुरुषोत्तम आदिपुरुष में प्रभास के राघव को एक उग्र और आक्रामक योद्धा के रूप में पेश किया गया था, जहाँ सारा ध्यान केवल एक्शन और तीखे संवादों पर था। इसके विपरीत, रामायण में रणबीर कपूर का चित्रण पारंपरिक मर्यादा पुरुषोत्तम की छवि के करीब है। उनके संवादों में त्याग और करुणा झलकती है, जो उन्हें एक एक्शन हीरो से ऊपर उठाकर एक आदर्श नायक के रूप में स्थापित करते हैं।

गेम ऑफ थ्रोन्स का विलन बनाम लंकापति रावण आदिपुरुष में सैफ अली खान का लुक दर्शकों को रावण नहीं, बल्कि किसी पश्चिमी फैंटेसी शो के आधुनिक विलन जैसा लगा था। वहीं, यश का रावण अवतार पौराणिक भव्यता से भरपूर है। भारी स्वर्णिम कवच और राजसी वेशभूषा में यश की प्रभावशाली उपस्थिति लंकापति के भय और शक्ति को प्रामाणिक बनाती है। सोशल मीडिया पर यश का यह रूप दर्शकों का सबसे बड़ा आकर्षण बना हुआ है।

वीडियो गेम से निकलकर यथार्थ की ओर आदिपुरुष की सबसे बड़ी कमजोरी उसके कृत्रिम और वीडियो-गेम जैसे वीएफएक्स थे। रामायण का ट्रेलर इस मामले में काफी अलग है। यहाँ तकनीक और वास्तविकता का सही संतुलन दिखता है। अयोध्या और दंडकारण्य के दृश्य जीवंत हैं, जिसमें वास्तविक सेट्स और आधुनिक प्रभावों का बेहतर मेल है।

संगीत और तकनीक का तालमेल जहाँ आदिपुरुष का संगीत केवल शोर और ऊंचे नारों पर आधारित था, वहीं रामायण में हंस जिमर और ए.आर. रहमान की जोड़ी ने एक गंभीर और ऑर्केस्ट्रल अनुभव तैयार किया है। यह संगीत महागाथा को अंतरराष्ट्रीय स्तर की भव्यता प्रदान करता है।

आस्था का सम्मान ही जीत की कुंजी केवल ट्रेलर पर आधारित अंतिम फैसला करना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह स्पष्ट है कि नितेश तिवारी ने आदिपुरुष की विफलता से सबक लिया है। जहाँ ओम राउत की फिल्म रामायण को हॉलीवुड-शैली की फैंटेसी में बदलने के चक्कर में अपनी आत्मा खो बैठी थी, वहीं रामायण भारतीय आस्था और मर्यादा को सम्मान के साथ पेश करती दिख रही है। दर्शकों के लिए यह आदिपुरुष के घावों पर एक मरहम जैसा है।

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