अलविदा जेंक्स : अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास, खत्म हुआ एक शानदार युग
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भारतीय क्रिकेट जगत के लिए गुरुवार, 30 जुलाई 2026 का दिन एक भावुक अध्याय लेकर आया। टीम इंडिया के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में गिने जाने वाले पूर्व उप-कप्तान अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से तत्काल प्रभाव से संन्यास की घोषणा कर दी है। 38 वर्षीय रहाणे ने सोशल मीडिया पर कैप नंबर 278, साइनिंग ऑफ लिखकर अपने 20 साल लंबे करियर को विराम दे दिया।

ऑस्ट्रेलिया में रचा था इतिहास रहाणे के करियर का सबसे सुनहरा पन्ना 2020-21 का ऑस्ट्रेलिया दौरा है। एडिलेड में शर्मनाक हार के बाद जब कप्तान विराट कोहली स्वदेश लौट गए, तब टीम की बागडोर रहाणे ने संभाली। उनकी शांत कप्तानी में भारत ने ऐतिहासिक वापसी की और बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीतकर विश्व क्रिकेट को हैरान कर दिया। उन्होंने कुल छह टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की, जिनमें से चार में भारत को जीत मिली।

विदेशी धरती पर रहे संकटमोचक रहाणे को विदेशी परिस्थितियों में बल्लेबाजी करने का उस्ताद माना जाता था। उन्होंने अपने करियर में 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 T20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 5,077 रन और 12 शतक दर्ज हैं। खास बात यह है कि उनके 12 में से 8 शतक विदेशी जमीन पर आए, जो उनकी तकनीक और धैर्य का प्रमाण है।

भावुक विदाई और आभार अपने विदाई संदेश में रहाणे ने कहा, जीवन की हर शुरुआत का एक अंत होता है। मैंने हमेशा अपने देश और टीम को खुद से ऊपर रखा और पूरी ईमानदारी से खेला। क्रिकेट ने मुझे हारना भी सिखाया, लेकिन आप सभी के दिलों में जो प्यार मुझे मिला, वह मेरी सबसे बड़ी जीत है। उन्होंने बीसीसीआई, मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन, अपने कोचों, साथियों और प्रशंसकों का दिल से आभार जताया।

सफेद गेंद और IPL में दबदबा रहाणे ने 2014 T20 वर्ल्ड कप और 2015 वनडे वर्ल्ड कप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अलावा आईपीएल में भी उनका सफर शानदार रहा। उन्होंने 212 मैचों में 5,367 रन बनाए। 2026 सीजन में उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स की कप्तानी संभाली थी।

क्रिकेट जगत ने दी विदाई मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अजिंक्य नाइक ने रहाणे की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी शांत नेतृत्व क्षमता और दबाव में प्रदर्शन करने की अद्भुत कला आने वाली कई पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बनी रहेगी। एक बेहतरीन क्रिकेटर और एक सज्जन खिलाड़ी के रूप में रहाणे की कमी भारतीय ड्रेसिंग रूम में लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

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