क्या कोरोना का अमेरिकी कनेक्शन छिपा रहे हैं डॉ. एंथनी फौसी? सुनवाई में 111 बार लिया संविधान का सहारा
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दुनिया भर में तबाही मचाने वाली कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका के दिग्गज डॉक्टर और पूर्व चीफ मेडिकल एडवाइजर एंथनी फौसी एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। इस बार संकट यह है कि क्या कोरोना वायरस चीन की लैब में बना था या इसमें अमेरिकी फंडिंग का हाथ था?

सुनवाई में चुप्पी की दीवार वाशिंगटन डीसी में सीनेट होमलैंड सिक्योरिटी कमेटी की सुनवाई के दौरान डॉ. एंथनी फौसी ने चौंकाने वाला रुख अपनाया। रिपब्लिकन सीनेटरों के तीखे सवालों के जवाब देने के बजाय फौसी ने अपने होंठ सिल लिए। उन्होंने अमेरिकी संविधान के पांचवें संशोधन (Fifth Amendment) को ढाल बनाया और एक के बाद एक 111 बार इसका हवाला देते हुए जवाब देने से इनकार कर दिया।

क्या है पांचवा संशोधन? अमेरिकी संविधान का यह अधिकार किसी व्यक्ति को खुद के खिलाफ गवाही देने या खुद को दोषी साबित करने वाले सवालों के जवाब देने से बचाता है। फौसी ने अपने वकीलों की सलाह पर यह कदम उठाया। उनका तर्क है कि यह सुनवाई निष्पक्ष नहीं है, बल्कि उन्हें एक आपराधिक मामले में फंसाने की साजिश है।

डॉ. फौसी पर लगे गंभीर आरोप केंटुकी के सीनेटर रैंड पॉल ने फौसी को कठघरे में खड़ा करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं:

अगला कदम क्या होगा? राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा दी गई पूर्व माफी (Pardon) फौसी को पुराने मामलों में सुरक्षा प्रदान कर सकती है, लेकिन रिपब्लिकन नेताओं का कहना है कि यह सुनवाई पूरी तरह से अलग है। सीनेट अब फौसी के खिलाफ संसद की अवमानना (Contempt of Congress) का प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है।

कौन हैं डॉ. एंथनी फौसी? 85 वर्षीय फौसी अमेरिका के इम्यूनोलॉजी के सबसे बड़े चेहरों में से एक रहे हैं। उन्होंने 38 साल तक NIAID का नेतृत्व किया और 7 राष्ट्रपतियों को स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी। हालांकि, महामारी के दौरान मास्क, वैक्सीन और लॉकडाउन संबंधी नियमों को लेकर वे लगातार विवादों और रिपब्लिकन नेताओं के निशाने पर रहे हैं।

फिलहाल, इस सुनवाई ने न केवल कोविड-19 के मूल स्रोत पर उठ रहे सवालों को हवा दे दी है, बल्कि अमेरिकी राजनीति में भी एक नया भूचाल ला दिया है। अब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सीनेट की यह कार्रवाई फौसी के खिलाफ कोई ठोस नतीजा ला पाएगी या यह केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बनकर रह जाएगी।

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