दिल्ली से झांसी मात्र 4 घंटे में: बुंदेलखंड का गेम चेंजर बनेगा नया एक्सप्रेसवे
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उत्तर प्रदेश में सड़क परिवहन की तस्वीर तेजी से बदल रही है। इसी कड़ी में अब झांसी लिंक एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास के लिए एक बड़ी सौगात बनकर उभर रहा है। 106 किलोमीटर लंबा यह ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट दिल्ली, आगरा, लखनऊ और पूर्वांचल को सीधा झांसी से जोड़ने का काम करेगा।

दिल्ली से झांसी तक सुपरफास्ट सफर

इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद दिल्ली से झांसी की दूरी महज 4 घंटे में सिमट जाएगी। यात्री यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उपयोग करते हुए जालौन के फूलपुरा से सीधे झांसी पहुंच सकेंगे। यह मार्ग झांसी की चार प्रमुख तहसीलों—गरौठा, टहरौली, मोठ और सदर के 63 गांवों से होकर गुजरेगा।

4 बड़े एक्सप्रेसवे का अभेद्य नेटवर्क

झांसी लिंक एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा लाभ इसकी कनेक्टिविटी है। यह चार प्रमुख एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ता है:

5,001 करोड़ का निवेश और विकास का नया अध्याय

इस परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जा रहा है। कुल 5,001 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में 1,232 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। वर्तमान में इसे 6 लेन का बनाया जा रहा है, जिसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित करने की योजना है। इस एक्सप्रेसवे का निर्माण 3 साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

औद्योगिक विकास और रोजगार की नई राह

यह एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (BIDA) और डिफेंस कॉरिडोर के लिए लाइफलाइन साबित होगा। फूलपुरा और पिपरा में बनने वाले बड़े वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और इंडस्ट्रियल पार्क न केवल लॉजिस्टिक्स को रफ्तार देंगे, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगे।

यूपी की तीसरी सबसे महंगी सड़क परियोजना

लागत के नजरिए से झांसी लिंक एक्सप्रेसवे (47 करोड़ प्रति किमी) उत्तर प्रदेश की तीसरी सबसे महंगी सड़क परियोजना है। इससे पहले गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे (64 करोड़ प्रति किमी) और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (50 करोड़ प्रति किमी) का स्थान है। इस एक्सप्रेसवे के क्रियान्वयन से यूपी-एमपी के सीमावर्ती शहरों जैसे ग्वालियर, दतिया और टीकमगढ़ को भी बेहतर व्यापारिक कनेक्टिविटी मिलेगी।

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