भूसा काटने वाली मशीन चलाने वाली बेटी अब देश की शान: हरजिंदर कौर ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता सिल्वर
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भारतीय वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर ने एक बार फिर अपनी अद्भुत शक्ति और संकल्प का परिचय देते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रजत पदक (सिल्वर मेडल) अपने नाम किया है। महिलाओं की 69 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा में उन्होंने कुल 227 किलोग्राम वजन उठाकर भारत का गौरव बढ़ाया है।

पर्सनल बेस्ट के साथ शानदार प्रदर्शन हरजिंदर ने इस मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्नैच में 101 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 126 किग्रा वजन उठाया। उन्होंने कुल 227 किलोग्राम का भार उठाकर न केवल पदक जीता, बल्कि अपने करियर का नया पर्सनल बेस्ट रिकॉर्ड भी बनाया। इस जीत के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के पदकों की संख्या 11 हो गई है।

ब्रॉन्ज से सिल्वर तक का सफर यह कामयाबी हरजिंदर की निरंतर मेहनत का नतीजा है। इससे पहले उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। चार वर्षों के भीतर उन्होंने अपने खेल में सुधार किया और भारवर्ग बदलने के बावजूद इस बार सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाकर अपनी प्रतिभा को साबित किया है।

संघर्ष से भरी जीवन यात्रा पंजाब के पटियाला जिले के मेहस गांव की रहने वाली हरजिंदर का जीवन किसी प्रेरणा से कम नहीं है। एक साधारण किसान परिवार में पली-बढ़ीं हरजिंदर बचपन में खेतों में मवेशियों के लिए चारा काटने और भूसा काटने वाली मशीन चलाने का काम करती थीं। परिवार की आर्थिक तंगी के बीच की गई यह मेहनत ही उनकी आज की शारीरिक ताकत का आधार बनी है।

कबड्डी से वेटलिफ्टिंग तक का सफर खेलों में उनकी रुचि बचपन से ही थी। शुरुआत में उन्होंने कबड्डी की दुनिया में कदम रखा और अभ्यास के लिए रोजाना 5 किलोमीटर साइकिल चलाती थीं। कॉलेज के दौरान उनके कोचों ने उनकी असाधारण शारीरिक ताकत को पहचाना। रस्साकशी (टग ऑफ वॉर) से शुरू करते हुए कोचों की सलाह पर उन्होंने वेटलिफ्टिंग चुनी और आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रही हैं।

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