चीन इन दिनों एक ऐसी रहस्यमयी कवायद में जुटा है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। पिछले 20 महीनों से चीन लगातार बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहा है। जून में खरीदे गए 173 टन सोने के साथ ही अब चीन के पास कुल 2,346 टन आधिकारिक सोना जमा हो चुका है, जिसकी कीमत लगभग 34 लाख करोड़ रुपये है।
डॉलर पर लगाम लगाने की बड़ी साजिश चीन की इस गोल्ड-हंट के पीछे सबसे बड़ा मकसद अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता को खत्म करना है। चीन के पास 3 ट्रिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। डॉलर आधारित संपत्तियों को अमेरिका किसी भी समय प्रतिबंध लगाकर फ्रीज कर सकता है। सोना खरीदकर चीन खुद को इस आर्थिक खतरे से सुरक्षित कर रहा है ताकि भविष्य में अमेरिकी प्रतिबंधों का उस पर असर न हो।
युआन को वैश्विक पहचान दिलाना चीन अपने सोने के भंडार के दम पर अपनी मुद्रा युआन को डॉलर के विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहता है। दुनिया को यह संदेश दिया जा रहा है कि युआन के पीछे भारी मात्रा में सोना सुरक्षित है। इससे व्यापार में युआन का उपयोग बढ़ेगा और दुनिया भर में डॉलर का वर्चस्व कम होगा।
क्या 5500 टन सोना गुप्त है? आधिकारिक आंकड़ों के परे, गोल्डमैन सैश जैसी संस्थाओं का मानना है कि चीन के पास लगभग 5,500 टन अंडरग्राउंड यानी गुप्त सोना भी है। अगर इस अघोषित सोने को जोड़ दिया जाए, तो चीन का कुल भंडार करीब 7,846 टन तक पहुंच जाता है, जो अमेरिका के 8,133 टन के भंडार के बेहद करीब है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 5 वर्षों में चीन सोने के मामले में अमेरिका को पछाड़ सकता है।
अर्थव्यवस्था की सुस्ती के खिलाफ सुरक्षा कवच चीन की विकास दर 4.7 प्रतिशत से घटकर 4.3 प्रतिशत पर आ गई है और देश पर कर्ज का बोझ भी बढ़ रहा है। ऐसे में सोना चीन की अर्थव्यवस्था के लिए एक सुरक्षा कवच का काम कर रहा है। यह निवेशकों के बीच यह भरोसा जगाए रखता है कि मंदी या आर्थिक संकट के बावजूद चीन का खजाना सुरक्षित है।
प्राचीन फिलॉसॉफी गुआंजी का असर चीन की यह रणनीति उसकी प्राचीन आर्थिक फिलॉसॉफी गुआंजी से प्रेरित है। इस दर्शन के अनुसार, राजा को सोने और मूल्यवान धातुओं का अधिक से अधिक भंडारण करना चाहिए। यह भंडारण न केवल सेना को मजबूत बनाता है, बल्कि अकाल या किसी बड़े आर्थिक संकट के समय देश को टूटने से बचाता है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग इसी नीति पर चलते हुए चीन को एक नए महाशक्ति के रूप में तैयार कर रहे हैं।
#DNAमित्रों | क्या सोने का सुपरपावर बनने की रेस है? अगली जंग.. अब डॉलर Vs गोल्ड की होगी?#DNA #DNAWithRahulSinha #Gold #Dollar #China@rahulsinhatv pic.twitter.com/kSmukZHytY
— Zee News (@ZeeNews) July 28, 2026
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