नए शिक्षा मंत्री पर प्रियंका गांधी के तीखे वार से गूंजी लोकसभा, सरकार ने की माफी की मांग
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दिल्ली: लोकसभा में पेपर लीक कानून संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान उस समय भारी हंगामा मच गया, जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के अतीत पर सवाल खड़े कर दिए। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

प्रियंका गांधी का प्रहार चर्चा के दौरान प्रह्लाद जोशी पर निशाना साधते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया है, जिसने एक गर्भवती महिला के साथ बलात्कार करने वाले दोषियों की रिहाई पर न केवल सहमति जताई थी, बल्कि खुशी भी जाहिर की थी। इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जमकर विरोध किया।

रिजिजू का पलटवार: माफी मांगें प्रियंका संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे शिक्षा मंत्री का चरित्र हनन करार दिया और मांग की कि यदि प्रियंका गांधी अपने आरोपों को प्रमाणित नहीं कर सकतीं, तो उन्हें सदन से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए।

प्रह्लाद जोशी ने किया खंडन खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए प्रह्लाद जोशी ने कहा कि उन्हें इस मामले में कोई नोटिस नहीं दिया गया था। उन्होंने कहा कि बिना किसी प्रमाण के लगाए गए ये आरोप पूरी तरह निराधार हैं। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा कि सदन में जिम्मेदारी के साथ बात रखनी चाहिए।

कांग्रेस का बचाव और पुराना इतिहास विपक्ष की ओर से केसी वेणुगोपाल ने पलटवार करते हुए तर्क दिया कि जब सदन में जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी पर टिप्पणियां की जाती हैं, तब उन्हें रिकॉर्ड से नहीं हटाया जाता। उन्होंने सत्ता पक्ष के दोहरे रवैये पर सवाल उठाया।

युवाओं के मुद्दे पर सरकार को घेरा प्रियंका गांधी ने केवल शिक्षा मंत्री पर ही नहीं, बल्कि छात्रों के प्रदर्शन पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि घायल छात्रों और उनकी माताओं का दर्द उन्हें झकझोर गया। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से सवाल पूछा कि प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और लाठीचार्ज के आदेश किसने दिए।

उन्होंने सरकार से युवाओं की आवाज सुनने की अपील करते हुए कहा कि संसद जनता की अमानत है और जनप्रतिनिधियों को जनता के सेवक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

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