मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ पिछले 40 दिनों से चला आ रहा जन-आंदोलन अब हिंसक मोड़ ले चुका है। रावलकोट में चुनाव बहिष्कार कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना ने बर्बर कार्रवाई की है, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई है।
क्या है पूरा मामला? POK में पिछले काफी समय से लोग बुनियादी सुविधाओं, सस्ती बिजली और पाकिस्तानी हुकूमत की दमनकारी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर हैं। 27 जुलाई को जब यहां पहले चरण के विधानसभा चुनाव हो रहे थे, तब बड़ी संख्या में लोगों ने मतदान का पूरी तरह बहिष्कार किया।
सेना की बर्बर फायरिंग चुनाव के दिन हजारों की संख्या में लोग जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में मुजफ्फराबाद की ओर मार्च कर रहे थे। शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे निहत्थे नागरिकों पर पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने अंधाधुंध गोलियां चला दीं।
मौत का आंकड़ा बढ़ने की आशंका JAAC द्वारा जारी की गई सूची के अनुसार, मृतकों में उस्मान नजीर, काशिफ, मोहम्मद इब्राहिम, अर्सल असगर, हनीफ मोहम्मद बशीर, वसीम अफजल, बासित शाह और साबिर खान जैसे लोग शामिल हैं। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, घायलों की संख्या काफी ज्यादा है, जिसके चलते मरने वालों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
इंटरनेट सेवाएं ठप, दमन का दौर जारी हिंसा के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव व्याप्त है। सरकार ने विरोध की आवाजों को दबाने के लिए POK के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह से निलंबित कर दी हैं। इससे पहले 5 जून को सरकार ने JAAC संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था और कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था।
40 दिनों से उबल रहा है POK यह प्रदर्शन अचानक शुरू नहीं हुआ है। पिछले 40 दिनों से POK के लोग पाकिस्तान की कथित गुलामी और संसाधनों के दोहन के खिलाफ सड़कों पर हैं। अब तक के आंदोलनों और झड़पों में करीब 40 लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि, कड़े सुरक्षा घेरे और दमन के बावजूद, स्थानीय जनता का पाकिस्तान सरकार के खिलाफ गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है।
*Reports of multiple civilian casualties in PoK after security forces opened fire on protesters in Rawalakot. What started as a movement demanding basic rights and cheaper electricity has now faced a violent crackdown. pic.twitter.com/iOQjFD6B6t
— 𝐁𝐡𝐚𝐫𝐚𝐭 𝐅𝐢𝐫𝐬𝐭🇮🇳 (@Bharat_first111) July 27, 2026
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