नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लद्दाख लौटने से पहले अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को नमन किया। लेकिन इस यात्रा के दौरान वांगचुक जिस तरह अकेले नजर आए, उसने राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या उनका कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथ अब कोई नाता नहीं बचा है।
अकेले राजघाट पहुंचे वांगचुक अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वांगचुक सीधे राजघाट पहुंचे थे। इस दौरान सुरक्षा घेरे में सिर्फ उनकी पत्नी उनके साथ थीं। जून महीने में जब उन्होंने अनशन शुरू किया था, तब उनके साथ सीजेपी के नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे। इस बार पार्टी के किसी भी प्रमुख नेता की अनुपस्थिति ने दोनों के रिश्तों में आई दरार को सार्वजनिक कर दिया है।
अनशन तोड़ने पर मची रार वांगचुक और सीजेपी के बीच मतभेद की शुरुआत सरकार से हुई बातचीत के बाद हुई। आंदोलन का मुख्य केंद्र केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था, जिसे वांगचुक ने अंत में अपनी मांगों से हटा लिया। सीजेपी नेतृत्व, विशेषकर अभिजीत दीपके, इस फैसले से खुश नहीं थे। वांगचुक के अनशन तोड़ते ही सीजेपी ने ऐलान कर दिया कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक प्रधान इस्तीफा नहीं देते।
सरकार की फूट डालो रणनीति रही कामयाब? माना जा रहा है कि सरकार ने वांगचुक और सीजेपी से अलग-अलग बातचीत करने की सोची-समझी रणनीति अपनाई। सरकार ने वांगचुक की अन्य मांगें मानकर उन्हें मना लिया, जबकि सीजेपी अब भी मंत्री के इस्तीफे और प्रदर्शनकारियों पर कानूनी कार्रवाई रोकने की मांग पर अड़ी है। लद्दाख के नेताओं को भी वांगचुक को मनाने के काम में लगाया गया था।
क्या भविष्य में एक साथ दिखेंगे? सीजेपी अब कानूनी कार्रवाई के मुद्दे को लेकर दोबारा सक्रिय हो गई है और सरकार को आंदोलन फिर से शुरू करने की चेतावनी दे रही है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अगले किसी भी आंदोलन में सोनम वांगचुक सीजेपी के मंच पर वापस आएंगे? फिलहाल, दोनों के बीच बढ़ती दूरी ने इस गठबंधन के भविष्य पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
VISITED RAJGHAT…
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 27, 2026
before going home.
Thank you Bapu, for the path you showed…
We just learnt that it remains as relevant today as 100 years ago.
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