राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशें और नीलेकणि की नई टास्क फोर्स: क्या परीक्षा सुधारों का भविष्य सुरक्षित है?
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देश में नीट (NEET) और अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाओं ने लाखों छात्रों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। इस संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई-पावर टास्क फोर्स का गठन किया है। लेकिन चर्चा यह भी है कि क्या 2024 में गठित डॉ. के. राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशें पूरी तरह लागू हुई थीं?

राधाकृष्णन कमेटी: क्यों बनी थी और क्या थी सिफारिशें?

NEET-UG 2024 विवाद के बाद, सरकार ने पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई थी। इसका मकसद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली की समीक्षा करना था। समिति ने 21 अक्टूबर 2024 को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी थी।

कमेटी की प्रमुख सिफारिशें:

क्या इन सिफारिशों से रुक जाता पेपर लीक?

विशेषज्ञों का मानना है कि राधाकृष्णन कमेटी के सुझाव यदि समय रहते जमीन पर उतरते, तो पेपर लीक का जोखिम काफी कम किया जा सकता था। हालांकि, किसी भी परीक्षा प्रणाली को 100% सुरक्षित कहना कठिन है, क्योंकि तकनीक के साथ-साथ सेंधमारी के तरीके भी अपडेट होते रहते हैं।

नंदन नीलेकणि की टास्क फोर्स का दायरा क्या है?

अब सरकार ने नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक नई टास्क फोर्स बनाई है। दोनों समितियों में सबसे बड़ा अंतर यह है कि राधाकृष्णन कमेटी NTA की वर्तमान खामियों को दूर करने पर केंद्रित थी, जबकि नीलेकणि की टीम पूरी परीक्षा प्रणाली को भविष्य के लिए टेक्नोलॉजी आधारित और अभेद्य बनाने पर काम करेगी। इसका लक्ष्य सिर्फ सुधार नहीं, बल्कि एक पूरी तरह से नई और पारदर्शी प्रणाली का खाका तैयार करना है।

क्या पुरानी सिफारिशें अब भी मायने रखती हैं?

शिक्षा जानकारों का कहना है कि राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशें आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। नई टास्क फोर्स यदि इन सुझावों को अपनी आधुनिक तकनीकी रणनीति के साथ जोड़कर आगे बढ़ती है, तो परीक्षा प्रणाली में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

आगे की राह: क्या उम्मीद करें?

सरकार ने अब राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए एक हाई-पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी भी गठित कर दी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी स्पष्ट किया है कि सरकार इन सुझावों से आगे बढ़कर परीक्षा सुधारों की दिशा में काम कर रही है। अब सभी की निगाहें नंदन नीलेकणि की टास्क फोर्स की रिपोर्ट पर हैं, जो यह तय करेगी कि क्या आने वाले समय में छात्र बिना किसी डर के अपनी परीक्षाओं में शामिल हो सकेंगे।

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