बिहार के सीवान में NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान AK-47 से फायरिंग का एक वीडियो वायरल होने के बाद देश भर में बहस छिड़ गई है। सवाल यह है कि क्या भारत में कानून पुलिस को प्रदर्शनकारी भीड़ पर घातक राइफल चलाने की इजाजत देता है? आइए जानते हैं इसके कानूनी पहलू।
भारत का संविधान अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियार के एकत्र होने का अधिकार देता है। हालांकि, यह अधिकार असीमित नहीं है। यदि प्रदर्शन हिंसक हो जाए या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचे, तो पुलिस हस्तक्षेप कर सकती है। लेकिन इस दौरान भी पुलिस का प्राथमिक उद्देश्य भीड़ को तितर-बितर करना होता है, न कि प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाना।
भारतीय कानून पुलिस को किसी भी स्थिति में मनमाने ढंग से जानलेवा बल प्रयोग की अनुमति नहीं देता। पुलिस बल प्रयोग के लिए आवश्यकता और अनुपात (Necessity and Proportionality) के सिद्धांत का पालन करती है। इसका अर्थ है कि यदि स्थिति को लाठीचार्ज, वाटर कैनन या आंसू गैस से संभाला जा सकता है, तो घातक हथियारों का उपयोग करना पूरी तरह गैर-कानूनी है। गोली चलाना पुलिस का अंतिम विकल्प (Last Resort) होना चाहिए।
AK-47 एक असॉल्ट राइफल है, जिसे युद्ध के लिए बनाया गया है। इसकी मारक क्षमता इतनी अधिक होती है कि गोली शरीर को पार कर सकती है और पीछे खड़े निर्दोष लोगों को भी जानलेवा चोट पहुंचा सकती है। भीड़ में इसका इस्तेमाल करना मानवाधिकारों का सीधा उल्लंघन है, क्योंकि इसमें सटीक निशाना लगाने की गुंजाइश नहीं होती और इससे जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।
कानून के अनुसार, पुलिस केवल आत्मरक्षा या असाधारण परिस्थितियों में ही घातक बल का प्रयोग कर सकती है, जैसे:
पुलिस संविधान से ऊपर नहीं है। यदि किसी अधिकारी ने बिना पर्याप्त कारण और कानूनी प्रक्रिया के AK-47 का इस्तेमाल किया है, तो वह जवाबदेह है। ऐसे मामलों में:
सीवान मामले में पुलिस अधिकारी का निलंबन और जांच के आदेश यह स्पष्ट करते हैं कि भीड़ नियंत्रण के दौरान किसी भी प्रकार की अत्यधिक बल प्रयोग की कार्रवाई कानूनी समीक्षा के अधीन है। पुलिस का काम व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन यह अधिकार नागरिकों के जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के दायरे में ही रहकर इस्तेमाल किया जा सकता है।
*बिहार के सिवान में निहत्थे आंदोलनकारियों पर AK47 जैसे घातक हथियार का प्रयोग किसके कहने पर किया गया?
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) July 27, 2026
जो छात्र इसकी घातक फ़ायरिंग में घायल हुए हैं, उनके लिए पूरा देश चिंतित है।
पूरी दुनिया में फैले भारतीयों और ख़ासतौर से बिहार के मूल निवासियों के बीच इससे बेहद आक्रोश फैल गया… pic.twitter.com/rfSjeuyoKp
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