मेदांता से डिस्चार्ज होते ही राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, बोले- बापू का रास्ता आज भी सबसे प्रभावी
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स्वस्थ होकर राजघाट पहुंचे वांगचुक पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के तुरंत बाद, वह सीधा दिल्ली स्थित राजघाट पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो भी मौजूद रहीं। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

अहिंसा का मार्ग आज भी प्रासंगिक राजघाट पर श्रद्धांजलि देने के बाद वांगचुक ने संवाददाताओं से कहा कि 26 दिनों के लंबे उपवास के बाद उनकी पहली इच्छा बापू के चरणों में बैठने की थी। उन्होंने कहा कि लद्दाख में पिछले कुछ वर्षों से वे गांधीवादी तरीके से संघर्ष कर रहे हैं और यह तरीका पूरी तरह प्रभावी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गांधीजी का अहिंसा और शांति का मार्ग आज भी समाज और लोकतंत्र के लिए सबसे उपयुक्त है।

शांतिपूर्ण संघर्ष का संदेश वांगचुक ने देश और दुनिया के लोगों से अपील की कि अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्ण रास्ता ही चुनें। उन्होंने कहा, गांधीजी के रास्ते पर चलने से समाधान जरूर मिलता है। हो सकता है इसमें समय लगे, लेकिन अंधकार में इसका अंत नहीं होता। यदि पहली बार में सफलता न मिले, तो निरंतर प्रयास से रास्ता जरूर निकलता है।

26 दिन का लंबा संघर्ष सोनम वांगचुक 28 जून से नीट पेपर लीक मामले और छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे। लगातार 26 दिनों तक उपवास रखने के कारण उनकी सेहत बिगड़ गई थी, जिसके बाद 18 जुलाई को उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के हस्तक्षेप पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेदांता अस्पताल शिफ्ट किया गया था।

शुक्रवार को खत्म किया अनशन चिकित्सकों की निगरानी में इलाज कराने के बाद, शुक्रवार देर रात वांगचुक ने आधिकारिक रूप से अपना 26 दिन लंबा अनशन समाप्त किया था। अस्पताल से छुट्टी मिलते ही पहली सार्वजनिक यात्रा के लिए राजघाट का चुनाव करना उनके सिद्धांतों के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को दर्शाता है।

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