नीट (NEET) पेपर लीक मामले ने पूरे देश के युवाओं में भारी असंतोष पैदा कर दिया है। इस विवाद के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा, जिसके बाद केंद्र सरकार अब बैकफुट पर दिख रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार के लिए टास्क फोर्स के गठन का ऐलान किया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह डैमेज कंट्रोल 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी की नैया पार लगा पाएगा?
2024 के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में बीजेपी का प्रदर्शन उम्मीद से काफी खराब रहा। पार्टी की सीटें 62 से घटकर 33 रह गईं और वोट शेयर में भी बड़ी गिरावट आई। पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमिताओं को इसका एक प्रमुख कारण माना गया। अब 2027 के चुनाव से पहले उठ रहा यह नया बवंडर पार्टी नेतृत्व के लिए गहरी चिंता का विषय है।
यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी इस डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। उन्होंने सफल छात्रों और उनके अभिभावकों से मुलाकात कर सरकार का पक्ष रखा है। लखनऊ में राहुल गांधी के धरने के विरोध में मार्च का नेतृत्व करना भी इसी रणनीति का हिस्सा था, ताकि हताश और आक्रोशित कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया जा सके। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि समय रहते कार्रवाई न करना सरकार की सबसे बड़ी चूक रही।
बीजेपी के अपने ही वरिष्ठ नेताओं के बीच इस बात पर असहमति है कि सरकार ने प्रतिक्रिया देने में इतनी देरी क्यों की। एक नेता ने लाल कृष्ण आडवाणी और लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि धर्मेंद्र प्रधान ने मई में ही इस्तीफा दे दिया होता, तो विपक्ष को इसे बड़ा मुद्दा बनाने का मौका ही नहीं मिलता। अब सरकार कानून में बदलाव और सख्त फैसलों का दांव खेल रही है।
बीजेपी के पूर्व एबीवीपी नेता संतोष सिंह का दावा है कि नीट आंदोलन को विपक्ष और शहरी नक्सलियों ने हाईजैक कर लिया है। वे इसे 2020-21 के किसान आंदोलन जैसा बता रहे हैं, जिसे सरकार ने अंततः चुनावी रूप से मैनेज कर लिया था। पार्टी को उम्मीद है कि सख्त कानूनों के जरिए वे युवाओं के बीच बनी नकारात्मक धारणा को बदल लेंगे।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं हैं। वे इसे युवाओं के भविष्य और सरकार की विफलता से जोड़कर यूपी चुनाव की मुख्य धार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, बीजेपी ने इसे राजनीतिक रोटियां सेकने की कोशिश करार दिया है। आने वाले दिनों में संसद में पेश होने वाला परीक्षा संशोधन बिल और उसके बाद जनता की प्रतिक्रिया ही तय करेगी कि क्या बीजेपी इस चुनावी चक्रव्यूह से सुरक्षित बाहर निकल पाएगी।
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) July 25, 2026*
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