यूपी की सियासत में हलचल: अखिलेश के पुराने साथी स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ कांग्रेस की बढ़ती नजदीकी!
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं। इस बीच, एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने राज्य के सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व दिग्गज नेता और अखिलेश यादव के पुराने सहयोगी स्वामी प्रसाद मौर्य की कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम से हुई मुलाकात ने कई अटकलों को हवा दे दी है।

मुलाकात के बाद बढ़ी सुगबुगाहट राजेंद्र पाल गौतम इन दिनों यूपी में पार्टी को मजबूत करने के मिशन पर हैं। इसी सिलसिले में वे पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के आवास पर पहुंचे। मौर्य ने खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट X पर इस मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने इसे एक औपचारिक भेंट-वार्ता बताया है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसके पीछे बड़े सियासी मायने छिपे हैं।

क्या कांग्रेस के साथ जाएंगे मौर्य? स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ हुई इस मुलाकात के बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में वे कांग्रेस के साथ गठबंधन कर सकते हैं। सपा से अलग होने के बाद से ही मौर्य अपनी नई राह तलाश रहे हैं, और कांग्रेस के साथ उनका जुड़ना राज्य में दलित और पिछड़ा वर्ग के समीकरणों को बदलने की क्षमता रखता है।

कांग्रेस की आक्रामक रणनीति राजेंद्र पाल गौतम अपने यूपी प्रवास के दौरान बेहद आक्रामक नजर आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि राज्य में अगली सरकार कांग्रेस की बनेगी। यह बयान सपा-कांग्रेस गठबंधन पर भी सवाल खड़े करता है। अगर कांग्रेस अपने दम पर या नए साथियों के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी करती है, तो इंडिया गठबंधन के भीतर अखिलेश-कांग्रेस के रिश्तों में खटास आ सकती है।

मायावती से दूरी, मौर्य पर नजर कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता के बीच एक वाकया चर्चा का विषय बना रहा—राजेंद्र पाल गौतम बसपा सुप्रीमो मायावती से मिलने उनके आवास पर पहुंचे थे, लेकिन मुलाकात न हो सकी। मायावती से समय न मिलने के बाद कांग्रेस का स्वामी प्रसाद मौर्य के पास जाना यह साफ करता है कि पार्टी अब यूपी में अपने लिए नए और मजबूत साथियों की तलाश में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

आगामी विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की स्थिति क्या होगी, यह तो फिलहाल भविष्य के गर्भ में है, लेकिन स्वामी प्रसाद मौर्य की सक्रियता ने उत्तर प्रदेश के चुनावी खेल को और अधिक दिलचस्प बना दिया है।

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