कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का सिर गर्व से ऊंचा करने वाले वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह की सफलता सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि घोर गरीबी और अभावों पर जीत है। मणिपुर के इम्फाल वेस्ट के रहने वाले ऋषिकांत ने कभी अपनी जरूरतों के लिए रोजाना 150 रुपये की मजदूरी की थी। एक समय ऐसा भी आया था जब पेट पालने के लिए उन्हें खेल छोड़ने तक का फैसला लेना पड़ा था।
ग्लासगो में भारत का गौरव कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ऋषिकांत सिंह ने पुरुषों के 60 किग्रा भारोत्तोलन वर्ग में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा। अपने डेब्यू कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने कुल 264 किग्रा (121+143) वजन उठाया। स्वर्ण पदक के लिए उन्होंने अंतिम प्रयास में 151 किग्रा उठाने का साहसी दांव खेला, लेकिन वे चूक गए। अंततः मलेशिया के अनिक कासदान ने 273 किग्रा के गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता, जबकि ऋषिकांत ने सिल्वर पर कब्जा किया।
गरीबी से सेना के प्रशिक्षण तक ऋषिकांत का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उन्होंने मजदूरी की। हालांकि, उनकी मेहनत और प्रतिभा ने उन्हें इंडियन आर्मी के स्पोर्ट्स सेटअप तक पहुँचाया। यहीं से उनके पेशेवर करियर की शुरुआत हुई और वे भारत के सबसे भरोसेमंद हल्के वजन के लिफ्टर्स में से एक बन गए।
रिकॉर्ड्स की झड़ी ऋषिकांत का करियर पिछले दो वर्षों में तेजी से ऊपर गया है। 2025 में अहमदाबाद में आयोजित कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता और नेशनल रिकॉर्ड भी बनाया। इसके अलावा, 2024 नेशनल वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप के दौरान उन्होंने 61 किग्रा कैटेगरी में 124 किग्रा का शानदार स्नैच नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम किया था।
बर्मिंघम से ग्लासगो तक का सफर ऋषिकांत ने साल 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने 2025 वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह पक्की की। अब ग्लासगो 2026 में 60 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो दिहाड़ी मजदूर भी दुनिया के मंच पर देश का नाम रोशन कर सकता है।
Just in: Rishikanta Singh CREATES NEW Games Record in Snatch! 😍
— India_AllSports (@India_AllSports) July 26, 2026
Jumps to TOP spot at end of Snatch round in Men s 65kg category.
Clean & Jerk round to start shortly! #Glasgow2026 #Glasgow2026withIAS pic.twitter.com/idRBvQbwi6
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