देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और पेपर लीक जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने एक सुपर टास्क फोर्स का गठन किया है। इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अगुवाई में बनी यह टीम देश के परीक्षा तंत्र को एक अभेद्य डिजिटल किला बनाने की तैयारी में है। आइए जानते हैं इस टीम के उन 6 दिग्गजों के बारे में, जिनके पास परीक्षा माफिया का काम तमाम करने का जिम्मा है।
नंदन नीलेकणि: अभेद्य डिजिटल चक्रव्यूह डिजिटल क्रांति के जनक नीलेकणि इस टीम के मुखिया हैं। उनका लक्ष्य एक ऐसा एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाना है जिसे हैक करना नामुमकिन हो। साथ ही, एआई (AI) आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन से फर्जी परीक्षार्थियों और सॉल्वर गैंग की पहचान तुरंत हो सकेगी।
वी. कामाकोटी: साइबर हमलों से सुरक्षा IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं (CBT) को सुरक्षित बनाने पर जोर दे रहे हैं। डायनामिक रैंडमाइजेशन के जरिए हर छात्र के लिए सवालों का क्रम अलग होगा, जिससे सेंटर पर होने वाली धांधली रुकेगी। साथ ही, वे सर्वर को DDoS जैसे साइबर हमलों से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच तैयार कर रहे हैं।
एस. सोमनाथ: जीरो-एरर कार्यप्रणाली ISRO के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ इस टीम में अंतरिक्ष विज्ञान की कार्यप्रणाली ला रहे हैं। उनकी देखरेख में परीक्षा प्रक्रिया जीरो-डिफेक्ट मानक पर चलेगी। प्रश्न पत्र तैयार होने से परिणाम आने तक हर चरण की कई स्तरों पर तकनीकी जांच होगी, ताकि मानवीय गलती की कोई गुंजाइश न रहे।
तपन डेका: माफिया के जाल की खुफिया निगरानी IB के पूर्व डायरेक्टर तपन डेका इस टास्क फोर्स के खुफिया हथियार हैं। उनका काम डार्क वेब और सोशल मीडिया पर परीक्षा माफिया की गतिविधियों को ट्रैक करना है। वे लीक होने की साजिश को अंजाम तक पहुँचने से पहले ही नाकाम करने के लिए एक विशेष इंटेलिजेंस नेटवर्क तैयार कर रहे हैं।
अमृत लाल मीणा और अनीता करवाल: लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक न्याय लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट अमृत लाल मीणा पेपर ले जाने के लिए डिजिटल लॉक वाले कंटेनर और GPS ट्रैकिंग का खाका तैयार कर रहे हैं, जो केवल सेंटर पर ही खुलेंगे। वहीं, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और सख्त SOP लागू करने का जिम्मा संभालेंगी।
क्या पेपर लीक पर लगेगा स्थायी विराम? यह टीम चार प्रमुख स्तंभों—टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक सुधार पर काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सिफारिशों को सही तरीके से लागू किया गया, तो भारत की परीक्षा प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित और विश्वसनीय हो जाएगी। अब सबकी नजरें इस टास्क फोर्स की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य की आधारशिला रखेगी।
#WATCH | Prime Minister Narendra Modi shares a video and says, The Government of India is continuously taking various measures for the future of students. Those who tampered with the students future are languishing in jail. We have already established fast-track courts. We are… https://t.co/Jlw6NVlhQX pic.twitter.com/aDK6jfoIvT
— ANI (@ANI) July 26, 2026
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